जिसने कभी वक्त और हालातों से हार नहीं मानी, उसे हम युवराज सिंह कहते हैं

New Delhi :  2011 विश्व कप का मैच, भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया। युवराज सिंह दौड़ते दौड़ते हांफ रहे थे। अचानक उन्हें मैदान पर खून की उल्टियां होने लगी लेकिन वो फिर भी पवेलियन नहीं लौटे। देश की इज्जत का सवाल था, फाइटर लड़ा और खेला।

युवराज सिंह क्रिकेट जगत का वो नाम है जिसने कभी हार नहीं मानी। विरोधी टीमों की कलई खोल देने वाला फाइटर आज क्रिकेट छोड़ चुका है। मुंबई के होटल में उन्होंने क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। इस दौरान अपने भाषण में युवराज सिंह ने कहा कि मैंने जिंदगी में कभी हार नहीं मानी। युवराज ने आज दोपहर मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपने संन्यास का एलान किया है। युवराज ने अपना आखिरी मैच वेस्ट इंडीज के खिलाफ 30 जून 2017 में खेला था।

युवराज सिंह भारत के लिए अबतक 40 टेस्ट, 308 वनडे और 58 टी-20 मैच खेल चुके हैं। टेस्ट क्रिकेट में 33.92 की औसत से युवराज ने 1900 रन बनाए हैं। वहीं वनडे फॉर्मेट में युवराज के नाम 8701 रन दर्ज हैं। टी-20 क्रिकेट में युवराज सिंह ने 1177 रन बनाए हैं।

युवराज सिंह का जन्म 12 दिसम्बर, 1981 को चंडीगढ़ में एक पंजाबी परिवार में हुआ था। इनके पिता योगराज सिंह है जो कि एक पूर्व भारतीय क्रिकेटर रह चुके है साथ ही ये पंजाबी फ़िल्म के अभिनेता भी हैं। युवराज सिंह की माता शबनम सिंह है। इनके भाई जोरावर सिंह है। युवराज सिंह को बचपन में टेनिस और रोलर स्केटिंग जैसे खेलों में रुचि थी और वे इसमें काफी अच्छे भी थे। इन्होंने नेशनल अंडर 14 रोलर स्केटिंग चैंपियनशिप भी जीती थी। इन्हें इन खेलों में ज्यादा रूचि थी किन्तु इनके पिता यह नहीं चाहते थे। युवराज को क्रिकेट खेलने के लिए कहा करते थे।

वे युवराज को इसके लिए रोज ट्रेनिंग भी देते थे। इनके पिता चाहते थे कि युवराज उनकी ही तरह एक फ़ास्ट गेंदबाज बने किन्तु युवराज स्केटर बनना चाहते थे। युवराज सिंह ने अपनी पढ़ाई चंडीगढ़ के ही देव पब्लिक स्कूल से की। इन्होंने चाइल्ड स्टार के रूप में दो फ़िल्मों ‘मेहंदी सगण दी’ एवं ‘पट सरदार’ में भी काम किया। कुछ सालों बाद माता–पिता का तलाक हो गया और युवराज सिंह अपनी माता शबनम सिंह के साथ रहने लगे। इस तरह इनका शुरूआती जीवन बीता।