जब महिला IAS ने अपना खून देकर बचाई मरीज की जान, पेश की मिसाल

New Delhi : छत्तीसगढ के राजगढ के गाँव खजुरिया की रहने वाली कविता दांगी को बी पोजिटिव खून की जरूरत थी। ब्लड बैंक में खून नहीं मिला यहाँ तक कि परिवार के लोगों में भी उसके साथ का खून नहीं मिला। उसके बाद रायसिंह नाम के युवक जो ब्लड डोनेशन कैंप चलाते है उन्हें इसकी खबर दी गई।

उन्होंने वहाट्सएप्प पर इस मैसेज को वायरल किया। कुछ समय बाद यह मैसेज वहां की कलेक्टर साहिबा जिनका नाम निधि नेविददता को मिला तो वो अपने आप को रोक नहीं पाई। निधि जो कलेक्टर है और उन्हें जब यह मैसेज मिला तो वो अपने आप को रोक नहीं पाई और सबसे पहले ब्लड बैंक आकर यहाँ पर जानकारी प्राप्त की उसके बाद खुद अस्पताल गई और कविता को खून दिया और उसकी जान बचाई। निधि जी ने बताया की जब उन्हें यह मैसेज मिला की इस लड़की को खून नहीं मिल रहा है तो एक बार हैरानी हुई उसके बाद स्थिति का जायजा लिया तो समझ आया की आचार सहिंता के चलते ब्लड बैंक में ब्लड की कमी आई है। उसके बाद मैंने खुद खून देने का सोचा क्योंकि मेरा भी बी पोजिटिव खून है। मैंने रविवार को मतदान किया और अब रक्तदान कर रही हूँ। मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है।

निधि ने बताया की उनका ध्यान कभी इस तरफ नहीं आया पर जब स्थिति समझ आई तो अब मुझे लगता है की ब्लड डोनेशन के प्रति मेरा रुझान होना चाहिए। इसलिए मैं कैंप चलाने वाली हूँ ताकि आगे से हमारे क्षेत्र में ऐसी किसी भी तरह की कोई प्रॉब्लम ना हो। हमें लगता है की हर एक इंसान को जिंदगी में खून डोनेट जरुर करना चाहिए क्योंकि हम जितना खून डोनेट करते है उतना ही हमारे अंदर और खून बन जाता है। ऐसे में ब्लड डोनेट करने में किसी भी तरह की ढील नहीं बरतनी चाहिए। मैं सभी से यह प्रार्थना करती हूँ की सभी को ब्लड डोनेट करना चाहिए।