विधायक ने महिला SDM पर किया गंदा कमेंट…बाद में उनका क्या हाल हुआ हर नेता को पढ़ना चाहिए

New Delhi : केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के एक विधायक महिला आईएएस अफसर पर सरेआम कमेंट कर आरोपों में घिर गए हैं। अफसर ने एक कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स में गैरकानूनी कंस्ट्रक्शन रोकने की कोशिश की थी, जिससे खफा देवीकुलम से विधायक एस राजेंद्रन ने महिला अफसर को बिना दिमाग वाला बता डाला। बाद में चारों ओर उनकी आलोचना हो रही है

कई टीवी चैनलों ने विधायक का विडियो फुटेज भी दिखाया है, जिसमें वो अफसर पर विवादित टिप्पणी करते देखे गए हैं। विधायक बोले- सब कलेक्टर के पास दिमाग नहीं : मामला मन्नार के देवीकुलम का है, जहां की पहली महिला सब-कलेक्टर रेणु राज ने पंचायत की ओर से किए जा रहे निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी। इसकी खबर पर क्षेत्र के विधायक के पास पहुंची तो वो कलेक्टर के फैसले से खफा हो गए। उन्होंने सरेआम आईएएस अफसर पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर डाली। विधायक राजेंद्र ने कहा, ”यह पहला मौका है जब सरकार ही सरकार से एनओसी की मांग कर रही है। मैंने इससे पहले कभी इतने स्मार्ट लोग नहीं देखे।” उन्होंने कहा, ”बिल्डिंग के निर्माण के कामकाज देखना पंचायत का काम है, उनका काम नहीं है। उन्हें इस बारे में जानने और समझने की जरूरत है। ऐसे लोग बिना कॉमन सेंस और दिमाग के ही यहां आ गए हैं।” विधायक की ये बात कैमरे में कैद हो गई और इसे कई टीवी चैनलों ने प्रसारित भी किया। इसके बाद से इस टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है और विधायक की आलोचना हो रही है।

सब कलेक्टर ने दिया ये रिएक्शन : विधायक ने जब ये बात कही तब सब कलेक्टर मौके पर मौजूद नहीं थीं, पर उन्हें इस बात की खबर बाकी अफसरों के जरिए मिली, जो मौके पर मौजूद थे। सब कलेक्टर रेणु राज ने इस मामले को लेकर कहा, ‘अवैध कंस्ट्रक्शन को लेकर पंचायत को 6 फरवरी को एक मेमो जारी किया गया था, लेकिन यहां काम अब भी चल रहा है, जिसके खिलाफ मैंने एक्शन लिया। सब कलेक्टर ने कहा, ”घटना के शुरू में मैं काफी निराश हो गई थी, पर विधायक के इस बर्ताव के बाद मुझे मेरे सीनियर्स, मीडिया और पॉलीटिकल लीडर्स का सपोर्ट मिला। मुझे यकीन है कि मैंने सही काम किया है।”

प्रदेश के राजस्व मंत्री भी सब कलेक्टर के सपोर्ट में उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि सब कलेक्टर द्वारा लिया गया फैसला कानून के हिसाब से सही था। जब वो कानून के मुताबिक काम कर रही हैं तो हमें उनका समर्थन करना चाहिए। बता दें, 2010 में केरल हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि मन्नार में किसी भी तरह के नए कंस्ट्रक्शन के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी एनओसी की जरूरत होगी।