स्वर्ग जैसा सुंदर और शांत है उत्तराखंड का गांव कुटी, हर समय ठंडा-ठंडा, कूल-कूल रहता है

New Delhi :  समुंद्र तल से करीब 15 हजार फीट पर उत्तराखण्ड की पहाड़ियों में बसे एक छोटे से गांव कुटी को शायद आपने पहले कभी नहीं देखा होगा। कुटी बर्फीली पहाड़ियों और नदी किनारे बसा शांत और एक खूबसूरत गांव है। साल 2011 की जनगणना के मुताबकि, उत्तराखण्ड में पिथौरागढ़ जिले के इस गांव में 115 परिवार रहते हैं। इस गांव में कुल 363 लोग रहते हैं, जिनमें 198 पुरूष और 165 महिलाएं है।

हालांकि यहां एक होटल चलाने वाले व्यक्ति का कहना है कि अब इस गांव में करीब 100 लोग बचे हैं। ज्यादातर लोग यहां से जा चुके हैं। कहते हैं पांडवों के वनवास के दौरान राजा कुंतिभोज की पुत्री कुंती यहां ठहरी थीं। जिसके बाद इस गांव का नाम कुटी पड़ गया वादियों में बसा ये गांव छोटा कैलाश पर्वत के रास्ते में पड़ता है। अपनी खूबसूरती के कारण ये गांव पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है।

हालांकि गांव के बीच में एक छोटा मैदान है। यहीं इन गांव वालों के लिए मनोरंजन का जरिया है। लोग यहां टेनिस, बैडमिंटन जैसे खेल खेलते हैं। इस गांव में करीब 100 घर हैं जो 200 साल से भी पुराने हैं। मिट्टी-पत्थर से बने इन घरों में रंग-बिरंगे खिड़की-दरवाजें एक अलग ही कलाकारी का प्रदर्शन करते हैं। ‘पर्यटक गृह कुटी’ यानि यात्रियों के ठहरने की जगह। इस गांव में ऐसी कई इमारतें हैं जिनमें यात्री आराम करते हैं। गांव के लोग कैलाश यात्रा के दौरान इन्हीं कुटियों से ज्यादा कमाई कर पाते हैं। सशस्त्र सीमा बल (SSB) और इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के जवान यात्रियों और गांव के लोगों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।