कोई पक्षी प्यासा ना रहे इसके लिए फ्री में 6 लाख के मिट्टी के बर्तन बांट चुके हैं श्रीमन नारायणन

New Delhi : आज हम आपको खूबसूरत केरल की एक खूबसूरत खबर बताते हैं। यहां एर्नाकुलम जिले का Muppathadam आजकल काफी सुर्खियों में है। इसकी वजह हैं 70 साल के एक अंकल। अकंल ने काम ही इतना शानदार किया है जिसे सुनकर आप भी इनकी तारीफ ही करेंगे।

इनकी कहानी कुछ कुछ 2.0 फिल्म के पक्षीराजन जैसी है। कई सालों पहले इन्होंने कसम खाई किसी पक्षी को प्यासा नहीं रहने देंगे। 10 साल से इस कसम को वो बिना रुके पूरा कर रहे हैं। अंकल का नाम Sreeman Narayanan है। जितना अच्छा इनका नाम है उतना ही अच्छा काम। Sreeman Narayanan की उम्र 70 साल की है। अवॉर्ड विनिंग राइटर और लॉटरी डीलर नारायणन प्रकृति की रक्षा के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। गर्मियों का मौसम शुरू होते ही वो लोगों के बीच मुफ़्त में मिट्टी के बर्तन बांटना शुरू कर देते हैं, ताकि चिलचिलाती धूप में पक्षी पानी पी सकें। श्रीमन नारायणन इस नेक काम के लिए अब तक कुल 6 लाख रुपये की कीमत के 10 हज़ार मिट्टी के बर्तन बांट चुके हैं।

नारायणन ने पिछले साल एर्नाकुलम जिले में करीब 15 लाख रुपये की कीमत के 50 हज़ार पौधे मुफ़्त में बांटे थे। इस दौरान उन्होंने गांववालों से कहा था कि हर शख़्स अपने घर के आगे एक फ़लदार पेड़ ज़रूर लगाए, ताकि पक्षी फल खा सकें।

नारायणन का कहना है कि

वर्तमान में जिस तरह से लोग धरती के विनाश की रूप-रेखा तय करने में लगे हुए हैं, मैं नहीं चाहता कि आने वाले बच्चों का भविष्य भयानक हो। लॉटरी व्यवसाय और गांव के छोटे से रेस्तरां से मिलने वाली आय से जितना भी मुझसे हो सकता है, वो करने की कोशिश कर रहा हूं।

नारायणन का कहना है कि गर्मियों में पक्षियों के पानी पीने का एकमात्र ज़रिया हम इंसान ही होते हैं। वो बेज़ुबां जानवर हमसे मांगकर तो पानी पी नहीं सकते, इसलिए हमें ख़ुद ही ये पहल शुरू करनी होगी. अगर हम एक बर्तन में पानी डालकर रख दें, तो उससे 100 से अधिक पक्षियों की प्यास बुझ सकती है। मलयालम और अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर, नारायणन को साल 2016 में अपनी कविता ‘कुट्टीकालुडे गुरुदेव’ के लिए राज्य सरकार पुरस्कृत कर चुकी है। केरल की ‘पेरियार नदी’ में फैले प्रदूषण को लेकर भी वो कई किताबें लिख चुके हैं. पर्यावरण की रक्षा के प्रयासों के लिए हाल ही में उन्हें ‘SK Pottekkatt’ पुरस्कार मिल चुका है।