एयरफोर्स के लड़ाकू विमान उड़ाएगी चाय वाले की बेटी, वायुसेना में बनी महिला फाइटर पायलट

New Delhi :  कहते हैं इस दुनियां में कुछ भी नामुमकिन नहीं हैं। यदि आप एक बार मन में ठान लो कि आपको जीवन में कोई विशेष चीज हर हाल में हासिल करना हैं तो इसके बाद आपके रास्ते अपने आप ही बनने लगते हैं। दुनियां में दो तरह के लोग होते हैं। पहले वो जो अपने सपनो के रास्ते में मुसीबतें आने पर हार मान पीछे हट जाते हैं और दुसरे वे जो हर मुसीबत का डट कर सामना करते हैं, उसका हल खोजते हैं और अपनी लगातार कोशिशों के बाद सफलता का स्वाद चखते हैं।

आज हम आपको ऐसी ही एक लड़की से मिलाने जा रहे हैं जिसने लाइफ में अपनी परिस्थितियों को कभी भी अपने सपनो के आड़े नहीं आने दिया। फिर नतीजा ऐसा निकला कि हर कोई बस देखता ही रह गया। इनसे मिलिए। ये हैं मध्य प्रदेश के नीमच जिले की रहने वाली 24 वर्षीय आँचल गंगवाल। आँचल का हाल ही में इंडियन एयरफोर्स में बतौर पायलट के पद पर सिलेक्शन हुआ हैं। लेकिन आँचल के लिए ये मुकाम हासिल करना इतना आसन नहीं था। वजह थी उनके घर की कमजोर आर्थिक स्थिति। दरअसल आँचल के पिता सुरेश गंगवाल मध्य प्रदेश के नीमच जिले में चाय की एक दूकान चलाते हैं। ऐसे में उनकी कमाई इतनी नहीं हैं कि वे अपने तीनो बच्चों को सुख सुविधाओं के साथ अच्छे लेवल की एजुकेशन दे सके। हालाँकि सुरेश ने पहले से ही ये सोच रखा था कि वो अपनी आर्थिक स्थिति को अपने तीनो बच्चों की पढ़ाई के आड़े नहीं आने देंगे। इसके लिए उन्होंने बच्चों की शिक्षा के लिए लोन लिया और उन्हें अपने सपनो को पूरा करने में मदद की।

इधर सुरेश की बेटी आँचल ने भी अपने पिता की इस मेहनत को व्यर्थ नहीं जाने दिया और सफलता का ऐसा मुकाम हासिल किया कि आज उसके पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। आँचल बताती हैं कि उसके लिए एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट पास करना कोई आसन काम नहीं था। पिछले कुछ सालों में आँचल ने बोर्ड द्वारा आयोजित पांच इंटरव्यू में भाग लिया था लेकिन उन्हें नाकामी हासिल हुई थी। लेकिन आँचल ने हर नहीं मानी और छठी बार में उन्हें सफलता हाथ लगी।

बताते चले कि एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट में करीब 6 लाख लोगो ने हिस्सा लिया था। इसमें से देशभर में सिर्फ 22 अभियार्थियों का सिलेक्शन हुआ हैं। आँचल गंगवाल उन्ही में से एक हैं। आँचल मध्य प्रदेश की अकेली ऐसी अभ्यार्थी हैं जिसका सिलेक्शन वायु सेना में हुआ हैं।

आँचल बताती हैं कि उसे वायु सेना में भर्ती होने की प्रेरणा साल 2013 में आई उत्तराखंड आपदा में काम कर रहे भारतीय वायु सेना के बचाव के काम से मिली। इस घटना के बाद आँचल इतनी ज्यादा प्रभावित हुई कि उन्होंने वायु सेना में जाने का मन बना लिया। उस दौरान आँचल 12वीं में पढ़ती थी। उधर बेटी की कामयाबी के बाद पिता सुरेश गंगवाल बेहद खुश हैं। वे कहते हैं कि मेरी बेटी की वजह से मेरी नामदेव चाय की दूकान का नाम और भी बढ़ गया हैं। लोग जब भी यहाँ आकर मुझे बधाई देते हैं तो मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो जाता हैं। आँचल ने ये साबित कर दिया कि बेटियां भी बाप का नाम रोशन कर सकती हैं।