गांव की लड़कियों के लिए मिसाल हैं इल्मा, छोटे से गांव से निकलकर IPS बनी किसान की यह बेटी

New Delhi :  भारत के गांवों की लड़कियों को कम समझने की गलती कोई ना करे। गांव की लड़कियां भी आगे जाकर IAS-IPS बनती हैं। ये साबित करके दिखाया IPS इल्फा अफरोज ने। भारत में हर युवा का सपना होता है कि वो विदेश में पढ़े वहीं बड़ी नौकरी करे और मोटा पैसा कमाए। लेकिन, कई इल्मा जैसे लोग भी हैं, जो अपने देश के लिए कुछ करना चाहते हैं। गरीबी से जूझकर और कड़े संघर्ष के बाद, आज वो एक IPS आफिसर हैं।

इल्मा अफरोज, यूपी के मुरादाबाद की रहने वाली हैं। वो एक किसान की बेटी हैं। उनके पिता के निधन के बाद वो मां और भाई के साथ खेतों में हाथ बंटाने लगी, लेकिन उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी। जहां लोगों को सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास करने में कई-कई साल लग जाते हैं, वहीं गांव की इस बेटी ने ने पहली बार में ही 217वीं रैंक हासिल कर ली। इल्मा कहती हैं किजब उन्हें पता चला कि UPSC के एक्जाम में उन्होनें 217वीं रैंक हासिल की तो उनके मुंह से जय हिंद निकला।

एक चैनल को इंटरव्यू देते हुए उन्होंने बताया कि वो एक ऐसी जगह से ताल्लुक रखती हैं, जहां उन्होनें मोमबत्ती में भी पढ़ाई की है। उनकी मां चुल्हे पर रोटी बनाया करती थीं। सफलता की राह आसान नहीं होती है। कई बार उनके साथ ऐसा भी हुआ, जब असफलता हाथ लगी। वो वकील बनना चाहती थी लेकिन स्कॉलरशिप न मिलने पर कोलंबिया यूनिवर्सिटी में एडमिशन नहीं हो पाया। वहीं जब उन्होनें मेहनत शुरू की तो रास्ता अपने आप बनता चला गया। उनका कहना है कि सबसे ज्यादा शुक्रगुजार वो अपने मुल्क को करती हैं, जिसने उन्हें स्कॉलरशिप दी। जिस वजह से उनकी पढ़ाई बाहर विदेश में हो पाई। ख़ास बात ये है कि UPSC के exam में 217वीं रैंक लाने के दिन तक, इल्मा अफरोज खेतों में काम करती रहीं।