सोनिया गांधी ने 23 मई को बुलाई UPA नेताओं की बैठक, सरकार को लेकर होगा मंथन

New Delhi :  लोकसभा चुनाव-2019 के नतीजों से पहले आजतक-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल में एनडीए 8 बड़े राज्यों में क्लीन स्वीप करती नजर आ रही है। एग्जिट पोल के मुताबिक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार की बदौलत बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की वापसी के आसार हैं। इसके अलावा दिल्ली और हरियाणा में भी बीजेपी के अच्छे प्रदर्शन की बात कही जा रही है।

वहीं एग्जिट पोल में कांग्रेस और अन्य दलों को बहुमत से दूर रखा गया है। फिर भी सोनिया गांधी सक्रिय हो गई हैं। सोनिया ने 23 मई को UPA नेताओं की बैठक बुलाई है। जिसमें सरकार को लेकर मंथन होगा।

धराशायी हो गए थे 2004 के एग्जिट पोल :

चुनावी सर्वे एजेंसियों के लिए 2004 का लोक सभा सबसे ज्यादा निराश करने वाला था। इस चुनाव में सारी एजेंसियों के आकलन फेल हो गए थे। इसे सबसे बड़ा फेल्योर माना गया। सभी एजेंसियों ने ‘इंडिया शाइनिंग’ का नारा देने वाली एनडीए को दोबारा जनादेश मिलने का अनुमान लगाया था। रिजल्ट के दिन एनडीए 200 का आंकड़ा भी नहीं छू पाई थी। 1999 में कारगिल युद्ध जीतने के बाद भी एनडीए 189 सीटों तक सिमट कर रह गई थी। इस चुनाव में 222 सीटें हासिल करने वाली यूपीए ने समाजवादी पार्टी (SP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के सहयोग से सत्ता हासिल की।

2009 के एग्जिट पोल भी फेल हुए :

2009 का लोकसभा चुनाव भी एक तरह से सर्वे एजेंसियों का फेल्योर रहा। इस चुनाव में एजेंसियों ने UPA को 199 और NDA को 197 सीटें मिलने का कयास लगाया था। जबकि यूपीए जबरदस्त बढ़त लेते हुए 262 संसदीय सीटों पर लोगों का विश्वास जीतने में कामयाब रही। एनडीए को 159 सीटों पर संतोष करना पड़ा था।

2014 में एग्जिट पोल सही साबित हुए :

2014 का लोक सभा चुनाव में मोदी लहर का अनुमान एग्जिट पोल्स में दिखा था। ज्यादातर एग्जिट पोल्स में सभी ने भाजपा नीत एनडीए की जीत को सुनिश्चत करार दिया था। इसमें एक एजेंसी ने एकदम सही कयास लगाया था। एजेंसी ने बीजेपी को 291 और एनडीए को 340 सीटें मिलने का अनुमान लगाया था। रिजल्ट के दिन 543 सीटों में से बीजेपी को 282 और एनडीए को 336 सीटें मिलीं थीं। इसमें यूपीए 59 सीटों पर सिमट कर रह गई थी। जबकि अनुमान 97-135 सीटें मिलने का था। इसमें कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं।

कितने खरे उतरते हैं एग्जिट पोल?

1990 के दशक में टेलीविजन का प्रसार और राजनीतिक अनिश्चितता ने चुनाव के बाद एग्जिट पोल को लोकप्रिय बना दिया। 1998 के लोकसभा चुनावों में लगभग हर प्रमुख समाचार टीवी चैनल ने एग्जिट पोल किए। 1998 के लोक सभा चुनाव में चार बड़ी चुनावी सर्वे करने वाली एजेंसियां India Today/CSDS, DRS, Outlook/AC Nielsen और Frontline/CMS ने अपने सर्वे में बीजेपी नीत एनडीए को बड़ी पार्टी बताई थी, लेकिन 272 के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंचाया था। एग्जिट पोल में एनडीए को 214-249 के बीच सीटें और कांग्रेस नीत यूपीए को 145-164 सीटें मिलने का अनुमान था। इस चुनाव में NDA को 252 और कांग्रेस को 166 सीटें ही मिली थीं।

ऐसे ही पोल 1999 लोक सभा चुनाव के पहले हुए थे। इसमें India Today/insight, HT-AC Nielsen, Times poll/DRS, Pioneer-RDI और Outlook/CMS जैसी एजेंसियों ने एनडीए को 300 सीटें मिलने का अनुमान लगाया। इस चुनाव में अटल बिहारी वाली एनडीए को 296 सीटें मिली थीं। जबिक यूपीए को 134 सीटें मिली थीं। जबकि सर्वे में 132-150 सीटें मिलने का गणित लगाया गया था। सर्वे एजेंसियों ने तीसरे नंबर पर आने वाली पार्टी को 34-95 तक समेट दिया था जबकि यहां अनुमान पूरी तरह से फेल हो गया था। तीसरे नंबर की पार्टी को 113 सीटें मिली थी।