मां की पुकार सुनकर ‘मरे’ हुए बेटे के लौट आए प्राण, आंखों से बहने लगे आंसू

New Delhi : मां तो मां होती है। आज तक सुना ही था कि मां की एक आवाज से मरा हुआ बेटा भी लौटकर आ जाए आज वो सच भी हो गया। जी हां ये चमत्कार हुआ है। AAJ TAK की रिपोर्ट के अनुसार एक 18 साल के लड़के को डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित करके मां बाप को सौंप दिया। उसके अंतिम संस्कार की तैयारियां ही चल रही थीं कि वो जिंदा हो गया।

दरअसल लड़का कोमा में चला गया था। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित करके परिजनों को सौंप दिया। परिजन उसके अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे और मां अपने बेटे को रो रोकर पुकार रही थी। तभी एक चमक्कार हुआ। ब्रेन डेड घोषित हो चुके बेटे की आंखों से आंसू बहने लगे। ये देखकर घरवालों ने डॉक्टर को बुलाया और उसे अस्पताल में भर्ती करवाया जहां तीन दिनों के इलाज के बाद वो काफी हद तक ठीक हो गया है।

18 साल के गंधम क‍िरन तेलंगाना में सूर्यापेट ज‍िले के प‍िल्लालमैरी गांव का रहने वाला है। उसे 26 जून को बुखार आया। बुखार के साथ उसे उल्टी भी होने लगी। जिसके बाद उसे सूर्यापेट के एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 28 जून को उसकी हालत और ब‍िगड़ी तो उसे हैदराबाद के एक न‍िजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

हैदराबाद के अस्पताल में वह 3 जुलाई तक कोमा की स्थित‍ि में रहा। तब वहां के डॉक्टरों ने कहा क‍ि लड़के का ब्रेन डेड हो गया है और अब इसका बचना मुश्क‍िल है। डॉक्टरों ने कहा क‍ि अब लाइफ सपोर्ट के उपकरण हटा देने चाह‍िए और बॉडी को घर ले जाना चाह‍िए।

मां ने डॉक्टरों की बात नहीं मानी और कहा कि मेरा बेटा अंत‍िम सांस तक हमारे गांव के घर में रहेगा। उसे हमें जीवन रक्षा उपकरण के साथ ही घर ले जाएंगे। इसके बाद मां सैदम्मा बेटे को लेकर घर आ गईं। उनके संबंधी लड़के के अंत‍िम संस्कार की तैयारी करने लगे। घर में टेंट लगने लगा और च‍िता जलाने के ल‍िए लकड़ी की व्यवस्था भी कर ली। घर में उनके संबंधी रात भर रोते रहे। ऐसे में बेटे को देखने अंत‍िम बार मां ब‍िस्तर के पास गई और रोने लगी। मां की रोने की आवाज सुन उस बेटे के आंखों से भी आंसू बहने लगे, ज‍िसका द‍िमाग मृत हो गया था और ज‍िसका सुबह अंत‍िम संस्कार होने वाला था।

वहीं, एक स्थानीय डॉक्टर जी। राजाबाबू रेड्डी थे ज‍िसने लड़के की नब्ज चेक की तो वह चल रही थी। लड़के को वापस सूर्यापेट अस्पताल ले जाया गया। वहां रेड्डी ने हैदराबाद के डॉक्टरों को फोन लगाया तो उन्हें सलाह म‍िली क‍ि तत्काल लड़के को चार इंजेक्शनों का डोज लगाया जाए। इंजेक्शन लगाते ही लड़के की हालत ठीक होने लगी। तीन बाद ही लड़का ठीक हो गया और धीमी आवाज में बात भी करने लगा।