शिवखोड़ी : यहां खतरनाक गुफा पार करने के बाद होते हैं महादेव के दर्शन-पढिए यात्रा की पूरी कहानी

New Delhi : चुनावी माहौल में महादेव की कृपा रही और मुझे चुनावी माहौल में भी 2 से 8 अप्रैल तक की छुट्टियां मिल गईं। इस दौरान मैंने परिवार सहित माता वैष्णों देवी और शिवखोड़ी गुफा जाकर महादेव के दर्शन किए। मैं आपको आज अपनी शिवखोड़ी यात्रा के बारे में बताऊंगा।

शिवखोड़ी के लिए हमने कटरा से सुबह 9 बजे टैक्सी  ली। कटरा से निकलते ही हमारी टैक्सी ऊंची नीचें पहाड़ों में गोते खाने लगी। कटरा से थोड़ी ही दूर चले थे कि नौ देवी मंदिर आया। टैक्सी वाले खान साहब ने खुद बताया कि यहां आप नौ देवियों के दर्शन कर सकते हैं। हम टैक्सी से उतरे और सड़क से ही नीचे की तरफ बनी हुई करीब 300 सीढियों से नीचें उतरे। सीढ़ियों से नीचे उतरकर हम 9 देवी मंदिर पहुंचे जो एक छोटी सी नदी के किनारे बना हुआ है। मैंने परिवार से वहां नौ देवियों के दर्शन किए। वापस आते हुए वानर लीला भी देखी। दरअसल सीढियों पर बहुत से बंदर बैठे रहते हैं जो लोगों का प्रसाद छीनकर भागते हैं।

पहाड़ों की खतरनाक सड़कों से होते हुए रियासी पहुंचे :  वापस टैक्सी पर आकर हम शिव खोड़ी की गुफा की ओर चल दिए। ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों की तंग सड़कों पर टैक्सी घूम रही थी। मैंने ऐसी सड़कें कभी नहीं देखीं। करीब एक घंटे तक पहाड़ों में घूमते हुए हम पौनी गांव में रुके। यहां उतरकर मैंने स्थानीय लोगों से गांव के इतिहास को लेकर बात की। गांव के लोगों ने ज्यादा कुछ नही बताया बस कहा कि आप जैसे पर्यटक आते हैं जिससे हमारा घर चलता है। पौनी से हम चल दिए। करीब 3 पहाड़ों को पार करने में हमें 1 घंटे और लग गए जिसके बाद हम रियासी पहुंचे। रियासी जम्मू कश्मीर का एक जिला है। रियासी के अंतर्गत ही शिव खोड़ी गुफा आती है। रियासी शहर में घुसते ही मुझे एक सरकारी स्कूल दिखा और उसके बाहर पुलिस की चेक पोस्ट दिखी। एक सिंगल सड़क ही पूरे रियासी शहर को पार करवाती है। रियासी पार करने के बाद हम आर्मी चेक पोस्ट पर पहुंचे। वहां से एक रास्ता राजौरी तो दूसरा शिव खोड़ी की ओर जाता है।

रास्ते में पड़ी चिनाब नदी : शिवखोड़ी के रास्ते पर हम आगे बढ़ चले। करीब एक घंटे और पहाड़ों में ऊंची नीची सड़कों पर दौड़ते हुए हम चिनाब नदी पर पहुंचे। क्या विशाल नदी है। बिल्कुल मटमीला  पानी और तेज बहाव। चिनाब नदी कश्मीर की मुख्य नदी है। चिनाब नदी पर सिंगल रोड पुल बना हुआ जिसे पार करने के बाद एक बार फिर आर्मी चेक पोस्ट बना हुआ है। चिनाब पार करने के बाद हम 1 घंटे और पहाड़ों में घूमते रहे।

रनसू गांव पहुंचे और पास बनवाए :  आखिर कार कटरा से 4 घंटे के सफर के बाद रनसू गांव आया जहां शिवखोड़ी की गुफा स्थित है। टैक्सी ने हमें रनसू गांव में उतार दिया। जहां से हमें आगे का रास्ता पैदल तय करना था। हम करीब 1 किलोमीटर चले। हमें दूध गंगा दिखाई दी। जिसके साथ ही सड़क पर श्रीशिवखोड़ी श्राइन बोर्ड का दफ्तर है। यहां से हमने शिवखोड़ी गुफा के लिए पास बनवाए।

पास बनवाने के बाद यात्रा गेट पर हमारी चेकिंग हुई जिसके बाद हमारी शिवखोड़ी पैदल यात्रा शुरू हो गई। रनसू से गुफा 3.5 किलोमीटर दूर है। रनसू से गुफा तक जाने के लिए आपको घोड़े या पालकी मिल सकती है। जिसके लिए पहले श्राइन बोर्ड की पर्ची कटवानी पड़ती है। हम गुफा मार्ग पर आगे बढ़ चले। पहाड़ों में बना हुआ ये ऊंचा नीचा रास्ता ज्यादा चौड़ा नहीं है। यात्रियों को सावधानी के साथ चलना होता है। करीब एक किलोमीटर आगे चलने के बाद हमें गणेश लक्ष्मी मंदिर दिखा। यहां भी एक छोटी गुफा है। जिसमें लक्ष्मी गणेश विराजमान हैं। करीब 2.5 किलोमीटर और आगे जाने के बाद हमें गुफा नजर आई। ऊंचे पहाड़ के बीच महादेव की गुफा..शानदार नजारा था।

खतरनाक गुफा से निकलकर किए महोदव के दर्शन  : करीब 50 सीढिया चढ़ने के बाद गेट नंबर एक से हम गुफा के लिए लाइन में लगे और अपना मोबाइल और सामान क्लॉक रूम में जमा करवा दिया। अगर आप दिल के मरीज या बुजुर्ग के साथ गए हैं तो गेट नंबर दो से जाएं क्योंकि गेट नंबर एक का रास्ता खतरनाक गुफा से होकर जाता है। लाइन धीरे धीरे आगे बढ़ी और हम गुफा में प्रवेश कर गए। गुफा में प्रवेश करते ही हमें शांत माहौल और थोड़ी ठंडक महसूस हुई। गुफा में थोड़ी दूर आगे जाकर आई वो खतरनाक गुफा, जिसे पार करने के लिए भक्त अपनी जानपर खेल जाते हैं। गुफा में घुसते ही मुझे घुटनों के बल बैठना पड़ा और फिर पूरी गुफा में रास्ता झुककर लेटकर चलना पड़ा। हमने जैसे तैसे वो खतरनाक गुफा पार की। गुफा पार करने के बाद थोड़ा ऊपर जाकर हमें शिवलिंग के दर्शन हुए। गुफा में शिव के साथ साथ पूरे शिव परिवार और राम दरबार के दर्शन होते हैं। शिवलिंग की पूजा करने के बाद हम बाहर तक आने वाली एक और छोटी गुफा से बाहर आए। बाहर आकर मैंने महादेव को प्रणाम किया और परिवार के साथ वापस कटरा की ओर चल दिया।