न्याय के देवता है शनि…इनकी पूजा करने से जिंदगी में कभी नहीं आती कोई परेशानी

New Delhi : शास्त्रों में शनि को हमारे कर्म का और न्याय का देवता माना गया है। हमारे सभी अच्छे या बुरे कर्मों के पीछे शनि का ही हाथ होता है। शनि देव का रंग श्याम वर्ण हैं और अमावस्या की रात भी काली होती है इसलिए शनि को बेहद प्रिय है। हमारे सभी अच्छे या बुरे कर्मों पर शनि का नियंत्रण होने से महत्वता बढ़ जाती है। शनि यदि कुंडली मे तुला राशि या उत्तम भाव में हैं तो इंसान को बहुत कम समय मे बड़ी सफलता दिलाता है।

शनिश्चरी अमावस्या के दिन स्नान करके साफ वस्त्र पहनें। घर के रसोई घर को साफ कर के शुद्ध भोजन के साथ खीर अवश्य बनाएं।
घर की दक्षिण दिशा में मुंह कर के पितरों से अपनी गलती के लिए क्षमा मांगे और यह भोजन किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को दान करें। गाय को हरा चारा अवश्य खिलाएं तथा पीपल के नीचे पितरों के नाम से भोजन रखें। पितरों के नाम से शाम तक दवाई, वस्त्र, भोजन का दान करें। ऐसा करने से पारिवारिक कलह क्लेश तथा व्यापार से सम्बंधित समस्याएं खत्म होंगी।

शनि की कृपा पाने के लिए हमेशा अच्छे कर्म करें और गलत काम से परहेज करें। शनि की कृपा पाने के लिए मजदूरों, निर्धन व्यक्तियों और बीमार लोगों की मदद करें। शनिवार के दिन व्रत रखें या शुद्ध और सात्विक खाना खाएं। व्रत में दूध, फल, लस्सी आदि का सेवन कर सकते हैं। उड़द की दाल की खिचड़ी बनाकर शनि देव को भोग लगाएं। शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का चौमुखा दिया जरूर जलाएं। पीपल के पेड़ की सात परिक्रमा करें। शनि के मंत्र ॐ शं शनिश्चराय नमः का जाप सूर्यास्त के बाद करें।