पुरामहादेव : यहां भगवान परशुराम ने की थी महादेव की तपस्या, दर्शन करने से पूरी होती है हर मुराद

New Delhi :  सावन आने वाला है। सावन में कांवड़ यात्रा भगवान शिव की आराधना का ही एक रूप है। माना जाता है कि सावन में कांवड़ उठाने वाले भक्तों के साथ स्वयं भगवान शिव चलते हैं। इस यात्रा को करने वाले भक्तों पर भोलेनाथ की कृपा हमेशा बनी रहती है।

कांवड़ यात्रा की परंपरा का आरंभ भगवान परशुराम ने किया था। यह भी मान्यता है कि श्रवण कुमार पहली कांवड़ लाए थे। भगवान श्रीराम को भी पहला कांवड़िया माना जाता है। बागपत के बालौनी कस्बे के पुरा गांव में भगवान शिव का प्राचीन मंदिर लाखों शिवभक्तों की श्रद्धा का केंद्र है।

इसे प्राचीन सिद्धपीठ माना जाता है। लाखों शिवभक्त हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लाकर यहां भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। कहा जाता है कि भगवान परशुराम ने यहां घो’र तपस्या की और भगवान शिव ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए।

भगवान परशुराम ने भगवान शिव से अपनी माता को पुनर्जीवित करने की प्रार्थना की। भगवान शिव ने उनकी माता को जीवित कर दिया तथा एक फरसा भी दिया। यह मंदिर भगवान परशुराम की तपो भूमि है। मान्यता है कि भगवान परशुराम ने स्वयं ही यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। मान्यता है कि इस सिद्धपीठ पर मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।