मात्र 500 रुपए से शुरुआत करके महिला ने कमाए 10 करोड़…हर किसी को पढ़नी चाहिए इनकी सफलता की कहानी

New Delhi : इन दिनों देश के किसानों को लेकर खूब चर्चा हो रही है, पिछले दिनों किसानों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था, जिसके बाद सरकार ने किसानों के खाते में रकम डालने का ऐलान किया। इसी दौर में एक महिला किसान ऐसी भी है, जिन्होने मात्र पांच सौ रुपये से सफर शुरु किया था और आज करोड़ों की कंपनी की मालकिन हैं, आइये लाखों किसानों के लिये प्रेरणास्त्रोत बनी कृष्णा यादव के बारे में आपको बताते हैं।

कौन हैं कृष्णा ?
कृष्णा यादव कृष्णा पिकल्स की मालकिन हैं, उन्होने एक मीडिया हाउस से बात करते हुए बताया कि वो मूल रुप से यूपी के बुलंदशहर की हैं, वहां पति का व्यापार अच्छा चल रहा था, लेकिन अचानक पति को व्यापार को भारी नुकसान हुआ, जिसकी वजह से उनका सबकुछ बर्बाद हो गया, मजबूरी में उन्हें वापस खेती-किसानी की राह पर लौटना पड़ा, वो अपना गांव बुलंदशहर छोड़ गुरुग्राम आ गई, जहां उऩ्होने पट्टे पर कुछ खेत लिया और नई जिंदगी शुरु की।

किसानी से कुछ खास नहीं मिलता था : कृष्णा ने बताया कि किसानी से उन्हें कुछ खास नहीं मिल रहा था, किसी तरह बस गुजारा हो जाता था, तभी उनकी एक दोस्त के माध्यम से उन्हें अचार बनाने की ट्रेनिंग के बारे में जानकारी मिली, वो ट्रेनिंग सेंटर पर पहुंचकर ट्रेनिंग ली और फिर घर में अचार तैयार कर पति को बेचने के लिये सड़क के किनाके खड़ी कर दी, पहले तो लोगों ने उनका मजाक उड़ाया, लेकिन जब उनका कारोबार चल निकला, तो वही लोग अब उनकी प्रशंसा करते हैं।

बड़ी-बड़ी कंपनियों को कर दिया फेल : 45 वर्षीय कृष्णा यादव ने कहा कि उन्होने अपने आचार में दादी-नानी की नुस्खों को आजमाया, बचपन में अपनी मां को जैसे अचार बनाते देखती थी, वैसे ही उन्होने उसे तैयार किया, अपने खेतों में पैदा हुई फसलों (गाजर, मूली, टमाटर, गोभी और आंवला) का उन्होने सादगी से अचार तैयार किया, इसमें कोई नुकसानदायक तत्व नहीं डाला, तेल भी उतनी ही मात्रा में इस्तेमाल किया, जितना घर में बनाते समय किया जाता है। जब लोगों ने उनके अचार का स्वाद चखा, तो बड़ी-बड़ी कंपनियों के अचार खाना छोड़ दिया।

हजारों महिलाओं को रोजगार : आज कृष्णा यादव करोड़ों की कंपनी की मालकिन हैं, उन्होने बताया कि जैसे उन्हें सफलता मिलती गई, वो अपने काम का विस्तार करती गई, उन्होने और अधिक खेत किराये पर लिये, साथ ही और अधिक महिलाओं को अपने साथ जोड़ा, खेतों की ताजा फसल से उन्होने अचार की नई-नई किस्में तैयार की, जो बाजारों में हाथों-हाथ खरीदी गई, वो बताती हैं कि आज उनकी कंपनी में हजारों महिलाएं काम करती है।