नेताओं को कानून सिखाने के लिए जानी जाती हैं ACP ऋचा अग्निहोत्री,काट चुकी हैं CM की बस का चालान

New Delhi : जिंदगी की चुनौतियों का मुकाबला कर पाना हर इंसान के बस में नहीं होता। कुछ इनके आगे घुटने टेक देते हैं और कुछ अपने रास्ते बदल लेते हैं, लेकिन ऐसे भी लोग हैं जो इन चुनौतियों को अपनी ताकत बनाकर नई इबारत लिखने की हिम्मत दिखाते हैं। ऐसी ही शख्सियत हैं पीपीएस अफसर डॉ. ऋचा अग्निहोत्री।

पूर्व सीएम और एमएलए के खिलाफ ले चुकी हैं एक्शन : एक इंटरव्यू में ऋचा नु खुद बताया कि बैंस ब्रदर्स के मामले में उन्हें विधानसभा में पेश होना पड़ा, इसके बावजूद उन्होंने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। रूल्स तोड़ता पुलिस अफसर मिला या पंजाब के तत्कालीन सीएम बादल की बस, एसीपी ने सबका चालान कटवाया। पंजाब के कई विधायकों, एमपी और अन्य कई VVIP लोगों के चालान काटे जिन्होंने अपनी गाड़ियों पर हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर पीली और नीली बत्तियां लगवाई थीं। एक बार जब एमएलए बैंस की गाड़ी पर लगे स्टिकर उतरवा दिए तो शिकायत विधानसभा स्पीकर तक पहुंची। ऋचा को डीटीओ गर्ग के साथ विधानसभा में भी पेश होना पड़ा, लेकिन उन्होंने यह काम रोका नहीं

सवा साल में लोग कहने लगे लेडी सिंघम : उन्होंने रात में ड्रंकन ड्राइविंग रोकने के लिए खुद नाके लगाए। यही कारण रहा कि लुधियाना के लोगों के बीच वह लेडी सिंघम के नाम से मशहूर हुईं। एसीपी ऋचा अग्निहोत्री का कहना है कि कानून के दायरे में रहकर समाज की बेहतरी के लिए काम करना उनकी प्राथमिकता में शामिल रहा है और इसी लक्ष्य को लेकर उन्होंने पुलिस फोर्स ज्वाइन किया है। ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वाले वाहन चालकों का चालान काटने की बजाय ऋचा ने उन्हें फूल देकर अपनी गलती का अहसास करवाया। बार-बार गलती करने वाले कई बिगड़ैलों को उन्होंने नींबू-मिर्ची का हार देकर शर्मिंदा किया। पंजाब में पहली बार चालान काटने की बजाय लाेगों को हेल्मेट देने की शुरुआत भी उन्होंने की। उनके इस फॉर्मूले को बाद में पूरे राज्य में अपनाया गया।

बेबाक और निष्पक्ष फैसलों से बनाई अपनी अलग पहचान : करीब सवा साल तक लुधियाना में एसीपी ट्रैफिक रहते हुए ऋचा ने जहां ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए इंजीनियरिंग सॉल्यूशन का सहारा लिया, वहीं अपने बेबाक और निष्पक्ष फैसलों से लोगों के बीच अपनी जगह बनाई। इस दौरान उन्होंने ट्रैफिक नियमों का वॉयलेशन करने वाले वीआईपीज के चालान काटे और सियासी दबाव की परवाह नहीं की। ट्रैफिक नियमों के तीन मुख्य सूत्र एजुकेशन, एन्फोर्समेंट और इंजीनियरिंग को लागू करके ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार किए। वह कहती हैं कि इसमें उनके पुलिस कमिश्नर प्रमोद बांसल का पूरा सहयोग रहा।

डॉक्टरी की कर चुकी हैं पढ़ाई : वह कहती हैं कि चुनौतियों को स्वीकार करना उन्हें अच्छा लगता है। अमृतसर में बतौर एसीपी हेडक्वार्टर तैनात डॉ. ऋचा ने डॉक्टरी की पढ़ाई की है, पुलिस फोर्स ज्वाइन करने की उनकी इच्छा उन्हें इस फील्ड में ले आई। पुलिस फोर्स में शामिल होने के पीछे उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी एक कारण रहा है। पिता एस के अग्निहोत्री और दादा प्रकाश अग्निहोत्री पुलिस अधिकारी थे। यही कारण रहा कि डॉक्टरी की पढ़ाई करने के बावजूद दादा और पिता के प्रभाव से वह अपने आपको अलग नहीं कर पाई। जालंधर की रहनी वाली ऋचा ने बीडीएस की पढ़ाई की और उसके बाद पीपीएस की तैयारी शुरू कर दी। वह अपने बैच में सबसे कम उम्र की पीपीएस अधिकारी थी। 2012 बैच की ऋचा अग्निहोत्री की शुरुआती पोस्टिंग लुधियाना में एसीपी ट्रैफिक के तौर पर हुई।