कोर्ट ने मोदी सरकार से कहा-तो सांसदों और विधायकों को मिलने वाली पेंशन बंद करो

New Delhi : पुरानी पेंशन बहाली की मांग करने वाले सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल के मामले में सरकार के रवैये की इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीखी आलोचना की है। हाईकोर्ट कहा कि नई पेंशन स्कीम अच्छी है तो एमपी और एमएलए पर क्यों नहीं लागू करते।

जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस राजेंद्र कुमार की खंडपीठ ने पूछा कि बिना कर्मचारियों की सहमति के सरकार उनका अंशदान शेयर में कैसे लगा सकती है। क्या सरकार असंतुष्ट कर्मचारियों से काम ले सकती है? कोर्ट ने कहा कि सरकार लूट-खसोट वाली करोड़ों की योजनाएं लागू करने में नहीं हिचकती और उसे 30 से 35 साल की सेवा के बाद सरकारी कर्मचारियों को पेंशन देने में दिक्कत हो रही है, कोर्ट ने पूछा सरकार को क्या कर्मचारियों को न्यूनतम पेंशन देने का आश्वासन नहीं देना चाहिए, कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों की हड़ताल से सरकार का नहीं, लोगों का नुकसान होता है।

आइए जानें की पूर्व सांसदों को क्या क्या सुविधाएं मिलती हैं :  संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम 1954 के तहत सांसदों को पेंशन मिलती है। एक पूर्व सांसद को हर महीने 20 हजार रुपये पेंशन मिलती है।
5 साल से अधिक होने पर हर साल के लिए 1500 रुपये अलग से दिए जाते हैं। बता दें कि योगी आदित्यनाथ कमेटी ने सांसदों की पेंशन राशि बढ़ाकर 35 हजार रुपये करने की सिफारिश की है।
आज की तारीख में पेंशन के लिए कोई न्यूनतम समय सीमा तय नहीं है। यानी कितने भी समय के लिए सांसद रहा व्यक्ति पेंशन का हकदार होगा।
एक अजीब विरोधाभासी नियम है। सांसदों और विधायकों को डबल पेंशन लेने का भी हक है। कोई व्यक्ति पहले विधायक रहा हो और बाद में सांसद भी बना हो तो उसे दोनों की पेंशन मिलती है।
पति, पत्नी या आश्रित को फेमिली पेंशन की सुविधा भी है। सांसद या पूर्व सांसद की मृत्यु पर उनके पति, पत्नी या आश्रित को आजीवन आधी पेंशन दी जाती है।
मुफ्त रेल यात्रा की सुविधा दी जाती है। पूर्व सांसदों को किसी एक सहयोगी के साथ ट्रेन में सेकेंड एसी में मुफ्त यात्रा की सुविधा है। अकेले यात्रा पर प्रथम श्रेणी एसी की सुविधा है।