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मैट नहीं थी तो जमीन पर ही की प्रैक्टिस,भारत के लाल ने मार्शल आर्ट में जीता गोल्ड..लहराया तिरंगा

New Delhi: रूस और यूक्रेन की जंग के बीच इस तस्वीर ने देशभर का दिल जीत लिया है। रूस की राजधानी मास्को में भारत का तिरंगा लहराया। मध्य प्रदेश के बेटे रोहित जाधव ने मार्शल आर्ट्स में गोल्ड जीतकर देश का नाम रोशन किया है।

खार्किल बॉर्डर से 740 किलोमीटर दूर रूस की राजधानी में वुशु गेम यानि चीनी मार्शल आर्ट्स में रोहित जाधव ने भारत का नेतृत्व किया था, जिसमें उन्होंने गोल्ड जीतकर तिरंगे की शान बढ़ा दी है। वुशु एक चीनी मार्शल आर्ट है। जो दो वर्गों में बंटा है। ताओलो और संसौ।

बता दें कि रोहित की उम्र 22 साल है। इन्हें गोल्डन बॉय का नाम दिया गया है। इंटरनेशनल लेवल पर उनका ये तीसरा गोल्ड मेडल है। अब तक उन्हें 12 मेडल मिल चुका है। रोहित के पिता एक ऑटो ड्राइवर हैं। पिता ने बताया कि रोहित की सफलता का ये सफर आसान नहीं था। घर पर न सुविधाएं थी और न ही पैसे। सफल होने के लिए बेटे ने  बहुत संघर्ष किए।

रोहित की बचपन से ही खेल में दिलचस्पी थी। पिता सेना में जाना चाहते थे, लेकिन उनका सपना अधूरा रह गया। हालांकि पिता के सपनों को पूरा करने के लिए बेटे ने उन सपनों को अपना सपना बना लिया। उनके सामने गरीबी आड़े आई लेकिन उन्होंने इसका भी डटकर मुकाबला किया। वुशु में उपयोग होने वाले मैट उनके पास नहीं थी तो उन्होंने जमीन पर ही खेलना शुरू किया। पिता तो बमुश्किल ही घर का खर्च उठा पाते थे, ऐसे में खेल की सामाग्री जुटाना मुश्किल था।

रोहित ने कहा कि- एक बार टूर्नामेंट में जाने के लिए 5 से 6 हजार रुपए लगते थे, ये पैसे कोच देते थे। कोच ने हमारी बहुत मदद की, उन्होंने प्रतिभा पहचान ली थी और कई बार पैसे देकर टूर्नामेंट में भेजा। उनका कहना है कि वुशु अभी ओलंपिक में शामिल नहीं है। लेकिन जब जीत के बाद राष्ट्रगान बजा तो वो पल उत्साह से भर देने वाला पल था।

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