शान-शौकत से दूर रहकर खेती भी करते हैं ये कैबिनेट मंत्री…देश के नेता इनसे कुछ सीखें

New Delhi :  आजकल एक पार्षद की शान-शौकत हैरत में डाल देती है और कई बार हम ऐसी भी तस्वीरें देखते हैं कि नेता के पैर में पानी न लग जाए, इसलिए उसे गोद में उठा लिया जाता है। लेकिन सोशल मीडिया पर काफी समय से एक तस्वीर शेयर हो रही है, जिसमें पुडुचेरी के कृषि मंत्री अपने खेतों में काम करते हुए दिख रहे हैं।

पुडुचेरी के कृषि मंत्री कमलाकनन की ये तस्वीर सबसे पहले वहां की राज्यपाल किरण बेदी ने शेयर अक्टूबर 2018 में शेयर की और देखते-देखते तस्वीर वायरल हो गई। किरण बेदी ने कमलाकनन की तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा, ‘अंदाज लगाइए कौन हैं ये? ये हैं पुडुचेरी के आदरणीय कृषि मंत्री। श्री कमलाकनन।।। वह एक सच्चे किसान हैं।’ तस्वीर में कमलाकनन पानी से भरे धान के खेत में फावड़ा चला रहे हैं। उनके पैस मिट्टी से सने हुए हैं और वह एक आम किसान की तरह खेती में मगन हैं।

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कमलाकनन की तारीफ की है। हतिंदर सिंह नाम के एक यूजर ने लिखा, ‘पुडुचेरी के ये मंत्री सादगी से रहते हैं, लेकिन बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। देश तभी विकास करेगा, जब खिलाड़ी को खेल मंत्री और किसान को कृषि मंत्री बनाया जाएगा।’ समीर खान ने ट्वीट किया, ‘श्री कमलाकनन के समर्पण को सलाम। वो एक सच्चे किसान हैं। हमें उनके जैसे और नेताओं की जरूरत है।’
अशोक कुमार खन्ना से लिखा, ‘आमतौर पर हमारे नेता काम करने में शर्म महसूस करते हैं। अगर वो किसानों की तरह मेहनत करें, तो उन्हें पता चले कि किसानों को दी जा रही एमएसपी बहुत कम है। कमलाकनन को सलाम।’

आर कमलाकनन कांग्रेस पार्टी के नेता हैं और थिरुनल्लार विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं। उनके पास कृषि मंत्रालय के अलावा बिजली, शिक्षा, सैनिक वेलफेयर और सामुदायिक विकास मंत्रालय भी हैं। दि हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार उस समय वह अपने विधानसभा क्षेत्र में गए थें और इस दौरान उन्होंने अपने खेतों में दो घंटे तक काम किया।

कमलाकनन ने बताया, ‘राजनीति में सक्रिय होने के बाद भी मैं खेती में समय देता हूं। हालांकि मंत्री बनने के बाद व्यस्त दिनचर्या के कारण समय कम मिल पाता है।’ उन्होंने कहा कि इस वह धान की खेती से संतुष्टि नहीं थे, इसलिए उन्हें मजबूरी में मंत्रालय के काम से छुट्टी लेकर वहां जाना पड़ा। इस धान की खेती के लिए खेत को सही तरह से तैयार नहीं किया गया था, जिसके चलते पैदावार घट गई थी। इसलिए उन्होंने खेत को खुद तैयार करने का फैसला किया।