करगिल जंग की हीरो रही स्क्वाड्रन टीम उड़ाएगी राफेल, पाकिस्तान की सीमा पर होगी तैनाती

New Delhi : भारतीय वायुसेना को इस साल विजयादशमी पर यानी की 8 अक्टूबर को पहला राफेल फाइटर जेट मिलने की उम्मीद है। पहले राफेल को लेने के लिए देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह खुद फ्रांस जाएंगे। अब ऐसे में सवाल उठ रहा है कि दुनिया के सबसे अत्याधुनिक फाइटर जेट माने जाने वाले राफेल को भारत में कौन उड़ाएगा।

चूंकि आम फाइटर जेट के मुकाबले राफेल की तकनीक भी अलग है और स्पीड भी बेहद ज्यादा है तो इसे वायुसेना के आम पायलटों के लिए उड़ाना संभव नहीं होगा। राफेल विमान के भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल होने से सालों पहले ही वायुसेना ने अपने कुछ चुने हुए पायलटों को इसकी ट्रेनिंग शुरू करवा दी थी। इन पायलटों की ट्रेनिंग में करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। ऐसे समय में जब सीमा पर पाकिस्तान से तनाव बना हुआ है तो भारतीय युद्ध तैयारियों के लिए राफेल किसी ब्रह्मास्त्र से कम नहीं होगा, क्योंकि पाकिस्तान के पास इसकी बराबरी का कोई भी फाइटर एयरक्राफ्ट नहीं है।

राफेल की अत्याधुनिक तकनीक को देखते हुए वायुसेना ने इसे उड़ाने का जिम्मा गोल्डन एरो 17 स्कवाड्रन को सौंपने का फैसला किया है जिसके बाद एक बार फिर से इस स्कवाड्रन को बहाल किया जा रहा है। यही यूनिट फ्रांस से पहली खेप में मिलने वाले राफेल फाइटर जेट को उड़ाएगी। बता दें कि गोल्डन एरो 17 स्कवाड्रन का गठन 1951 में हुआ था और साल 1999 के करगिल युद्ध में वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने खुद इसका नेतृत्व किया था। धनोआ ही फिर से इस स्कवाड्रन को शुरू करेंगे। यह स्कवाड्रन डे हैवीलैंड वैम्पायर एफ एमके 52 जैसे पुराने लड़ाकू विमान को भी उड़ा चुकी है।

बता दें कि फ्रांस से मिलने वाले पहले राफेल के बेड़े को सामरिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात किया जाएगा। इस एयरफोर्स स्टेशन से पाकिस्तान सीमा की दूरी सिर्फ 220 किलोमीटर है। राफेल विमान की तैनाती के लिए अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और पायलटों की ट्रेनिंग भी खत्म हो चुकी है