नंबर वन है हमारा ISRO..जो चीन और अमेरिका नहीं कर पाए वो ISRO ने किया,एक साथ छोड़े 104 सैटेलाइट

New Delhi : चांद से आज चंद कदम रह गया हमारा चंद्रयान। ISRO के वैज्ञानिकों का उससे संपर्क टूट गया लेकिन ये एक विफलता ISRO की सैंकड़ों सफलताओं पर भारी नहीं पड़ सकती। इसरो ने अनेक ऐसे कारनामे किए हैं जो देश की प्रतिभा का लोहा दुनिया में मनवाती है।

इसरो ने 1990 में पोलर सैटेलाइट लांच व्हीकल (पीएसएलवी) को विकसित किया। इस यान से सबसे पहला उपग्रह ऑर्बिट में 1993 में भेजा गया। बता दें कि इससे पहले यह सुविधा सिर्फ रूस के पास थी। इसरो के नाम 104 सैटेलाइट प्रक्षेपित करने का विश्व रिकॉड है। भारतीय वैज्ञानिकों ने PSLV के जरिए एक साथ 104 सैटेलाइट का सफल लॉन्च किया जिसमें 101 छोटे सैटेलाइट्स थे जिनका वजन 664 किलो ग्राम था। इतने उपग्रह का प्रक्षेपण दुनिया के किसी देश ने एक साथ नहीं किया है।

भारत ने खुद का नेविगेशन सिस्टम भी विकसित कर लिया है। भारत ने इस अभियान को पूरा करने के लिए सातवां और आखिरी उपग्रह साल 2016 में प्रक्षेपित किया जिसके बाद भारत, अमेरिका और रूस के बाद खुद का नेविगेशन सिस्टम बनाने वाला तीसरा देश बन गया।

जीएसएलवी मार्क 2 का सफल प्रक्षेपण भी देश के लिए एक बड़ी कामयाबी थी। इसमें देश में निर्मित क्रायोजनिक इंजन लगा हुआ था। इसके निर्माण के बाद से सैटेलाइट लॉन्च करने के लिए भारत को दुनिया के अन्य देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ा।