IPS रवि ने गोद लिया पूरा गांव, गरीब बच्चों के लिए स्कूल से लेकर सड़कें तक सबकुछ बनवाया

New Delhi :  बदन पर खाकी, कंधों पर कानून और व्यवस्था का बोझ, ललाट पर मुस्कान और मन में कुछ कर गुजर जाने का हौसला।  यह पहचान है उस IPS ऑफिसर की जो लोगों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं है।

यह कहानी एक ऐसे IPS की है जिसने जिसने पुलिस कप्तान के पद पर रहकर एक सोशल वर्कर की भूमिका निभाई। बदल दी हत्याओं के खूनी खेल में डूबे एक गांव की तस्वीर। केंद्र सरकार के आदर्श गांव योजना की हकीकत किसी से छुपी नहीं हैं। मगर आंध्र प्रदेश के इस काबिल पुलिस अफसर ने बिना किसी के कहे-सुने ही अंतरात्मा की आवाज पर एक गांव की तस्वीर बदलकर रख दी। आज हम अफसर से सोशल वर्कर बने इसी शख्स की कहानी बता रहे।

कर्नूल जिले में जब रवि कृष्ण एसपी बने तो उन्होंने गांव गोद लेने की ठानी। जिले में कप्पतरेल्ला नामक ऐसा गांव चुना, जहां अक्सर आपसी विवाद में खूनी खेल होते थे। रवि कृष्ण ने इस गांव की आबोहवा बदलने की ठान ली। गांव में पहुंचे और सभी संभ्रांत लोगों को एकजुट किए। उन्हें लड़ाईयों को मिलबैठकर ही सुलझा लेने के लिए प्रेरित किए। खुद मध्यस्थता कर एसपी ने कई विवाद खत्म कराए। देखते ही देखते गांव में मारकाट बंद हो गई। थाने और कोर्ट तक मुकदमे भी होने बंद हो गए।

रवि कृष्ण ने डीएम से कहकर गांव को 60 लाख रुपये दिलाए। जिससे सरकारी स्कूल के दस कमरे बन सके। गांव वालों की मांग पर एक सड़क भी बनवाई। गांव के अधेड़ अनपढ़ों को शिक्षित करने के लिए लिटरेसी प्रोग्राम भी चलाए। गांववालों का कहना है बिजली, पानी से जुड़ी हर समस्या की शिकायत मिलते ही आइपीएस ने दूर कराई।

आंध्र प्रदेश का यह आइपीएस अब तक डेढ़ लाख लोगों को नेत्रदान करा चुका है। कूर्नल जिले के ब्लाइंड स्कूल की बेहतरी के लिए इस आइपीएस ने कई गीत लिखकर खुद सुर दिए। उससे जो पैसा मिला, उस पैसे को बच्चों की शिक्षा के लिए दान कर दिया।