पति के लिए छोड़ी DM पोस्ट फिर किस्मत ने ऐसा साथ दिया कि पति-पत्नी आज दोनों DM हैं और ईमानदार भी

New Delhi : क्या कोई अपने जीवनसाथी के लिए डीएम बनने से इंकार कर सकता है? नहीं न। लेकिन इस लव स्टोरी में ऐसा ही हुआ है। 2016 में सरकार इन्हें डीएम बनाना चाहती थी, पर पत्नी के लिए इन्होंने मना कर दिया। लेकिन, अब किस्मत देखिए, एक बार फिर दोनों जोड़े को डीएम का चार्ज मिला है। दोनों की एक बेटी है जो आंगनवाड़ी केंद्र में पढ़ती है।

नितिन भदौरिया वैसे तो उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। लखनऊ सहित दूसरे राज्य से पढ़ाई करने के बाद इन्होंने प्राइवेट सेक्टर में भी काम किया। नितिन भदौरिया के माता-पिता से लेकर चाचा-चाची और दूसरे रिश्तेदार भी शिक्षा विभाग में सेवाएं दे चुके हैं| वे बताते हैं कि मेहनत आपको अच्छे मुकाम पर जरूर ले जाती है| आईएएस नितिन भदौरिया का कहना है कि सब कुछ आगे बढ़ता रहा और इस बीच उन्होंने आईएएस पास किया| उत्तराखंड कैडर होने के नाते उन्होंने पहाड़ और मैदान दोनों जगह सेवा दी हैं। भदौरिया सचिवालय के साथ-साथ आपदा के दौरान केदारनाथ में भी रह चुके हैं। इतना ही नहीं वो देहरादून के बाद हरिद्वार में विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के पद पर भी रह चुके हैं।

नितिन भदौरिया बताते हैं कि केदारनाथ में काम करना उनके लिए बेहद सुखद रहा। साल 2013 में जब केदारनाथ में आपदा आई थी, उस वक्त वे वहीं थे। इसके तुरंत बाद ही उनके जीवन में एक बेहद बड़ा बदलाव आया। घर में शादी की बातें चल रही थी। इस बीच 7 दिसंबर को जब वो केदारनाथ थे तब उनकी पहली बार स्वाति से बात हुई।

नितिन कहते हैं कि यह भगवान शिव बाबा केदार का आशीर्वाद ही है कि वह जैसा हमसफर सोचते थे, भगवान शिव ने उन्हें स्वाति के रूप में वैसा ही हमसफर दिया। 7 नवंबर 2013 को उनकी पहली बार स्वाति से बात हुई और साल 2014 में फरवरी महीने में उनकी शादी भी हो गई। हालांकि शुरू में काफी दिक्कतें आई, क्योंकि स्वाति छत्तीसगढ़ कैडर की थी और वह उत्तराखंड में पोस्टेड थी। लेकिन, पहली ही बातचीत में उन्हें स्वाति पसंद आ गई थी। उनकी बात करने का अंदाज उनकी सरलता और उनके अंदर कोई भी लिखावट नहीं थी और यही बात उन्हें पसंद आई और वह एक दूसरे के जीवन साथी बन गए।

जानिए, स्वाति भदौरिया के बारे में : स्वाति भदौरिया भी उत्तर प्रदेश से रहने वाली हैं। लेकिन, शादी के बाद दोनों ने बातचीत कर कैडर बदलने का फैसला लिया और स्वाति उत्तराखंड आ गई। स्वाति भदौरिया बताती हैं कि उनका परिवार भी एजुकेशन से जुड़ा है। लिहाजा उनके परिवार में भी वह पहली बेटी है जो आईएएस में सलेक्ट हुई। स्वाति आगे बताती हैं कि कई लोग यह सोचते हैं कि उनकी शादी लव मैरिज है। क्योंकि दोनों के परिवार एक जैसे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों एक दूसरे को जानते तक नहीं थे।

नहीं चाहती नितिन में कोई बदलाव हो : स्वाति कहती है कि उन्हें नितिन ऐसे ही पसंद हैं और वह कभी नहीं चाहती कि उनके अंदर किसी तरह का कोई बदलाव आए। स्वाति भदौरिया पति नितिन भदौरिया के साथ सचिवालय में तो तैनाती दे ही चुकी है। इसके साथ ही वह मसूरी में भी एसडीएम रह चुकी हैं। फिलहाल वो हरिद्वार में मुख्य विकास अधिकारी के पद पर तैनात हैं। उन्हें खुशी है कि शासन ने दोनों को बड़ी जिम्मेदारी दी है। स्वाति भदौरिया 2 दिन बाद चमोली में डीएम का चार्ज संभालेंगी। वहीं नितिन भदौरिया अल्मोड़ा में डीएम पद का कार्यभार संभालेंगे।

परिवार के लिए नही बने डीएम : आपको यहां पर एक खास बात यह भी बता दें कि नितिन भदौरिया 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। जबकि उनकी पत्नी स्वाति भदौरिया 2012 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। हरीश रावत सरकार में नितिन भदौरिया को पिथौरागढ़ में डीएम पद का चार्ज मिला था। लेकिन उस वक्त नई-नई शादी होने के बाद वह अपने परिवार को समय देना चाहते थे। नितिन भदौरिया कहते हैं कि 2016 में जब उनको डीएम बनाया गया, उस वक्त उन्होंने सरकार से अपनी कुछ मजबूरियां बताई। जिसको सरकार ने भी समझा। उसके बाद उन्हें सीडीओ पद पर तैनात किया गया था। नितिन का कहना है कि उस समय उनके जीवन में एक नई खुशी आने वाली थी, उनकी पत्नी गर्भवती थी। लिहाजा वह नहीं चाहते थे कि ऐसे वक्त में वह अपनी पत्नी के साथ ना रहे और उन्होंने पिथौरागढ़ में डीएम का चार्ज नहीं लिया।