हरियाणे के छोटे से गांव का लड़का 4थी रैंक के साथ बना IAS, पहले प्रयास में प्री भी नहीं निकला था

New Delhi : 2019 के यूपीएससी टॉपर हिमांशु जैन की कहानी रोचक तो है ही साथ ही प्रेरणादायी भी है। उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में न सिर्फ सफलता पाई बल्कि ऑल ओवर 4 रैंक लाकर टॉपर भी बने। लेकिन आपको हैरानी होगी कि अपने दूसरे प्रयास में जो लड़का टॉप करने के साथ परीक्षा पास करता है वो अपने पहले प्रयास में परीक्षा का प्री भी नहीं निकाल पाया था। ये कोई चमत्कार से नहीं उनकी मेहनत और उनके द्वारा बनाई गई स्ट्रैटजी से संभव हो पाया। 2019 की यूपीएससी परीक्षा जिसका रिजल्ट इस साल अगस्त महीने में आया था। रिजल्ट आने के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने अपनी सफलता के बारे में विस्तार से बात की।

हिमांशु मूल रूप से हरियाणा के पलवल जिले के होडल गांव के रहने वाले हैं। यहीं उनका जन्म हुआ और आरंभिक शिक्षा भी उनकी गांव के ही स्कूल से हुई। आठवीं तक अपने गांव में पढ़ने के बाद हिमांशु दिल्ली आ गए और यहां के स्कूल से ही फिर उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई की। शुरू से ही ब्राईट स्टूडेंट रहे हिमांशु के 12वीं में भी काफी अच्छे अंक आए और उनका दाखिला दिल्ली के जाने-माने हंसराज कॉलेज में हो गया। यहां से उन्होंने इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन की। इकोनॉमिक्स उनका फेवरेट सब्जेक्ट था जिसे ग्रेजुएशन में उन्हें विस्तार से जानने का मौका मिला। ग्रेजुएशन के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का मन बनाया और कॉलेज के लास्ट यर से ही उन्होंने इसकी तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने 2018 में जैसे ही ग्रेजुएशन पूरी की अपने पहले प्रयास में वो यूपीएससी की परीक्षा में बैठे थे।
पहले प्रयास में उनका प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं हुआ था। लेकिन इस रिजल्ट से उन्होंने न ही अपने आपको छोटा माना न ही कमजोर, बल्कि उन्हें परीक्षा और अपनी खामियों का अंदाजा हो गया। उन्होंने अगली परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी और अगली बार में प्री से लेकर इंटरव्यू सभी को क्लियर किया। उन्होंने जब परीक्षा की तैयारी की तो उन्होंने पाया की जिस प्रिलिम्स को वो नहीं निकाल पाए थे उसकी तैयारी में एक छात्र दो 50 से 60 दिन का समय लगाकर परीक्षा क्लियर कर सकता है। वो ज्यादा कठिन मेन्स परीक्षा को मानते हैं जिसके लिए ज्यादा और नीतिपरक तैयारी की सलाह देते हैं।
आमतौर पर लोगों को इस परीक्षा को पास करने में कई सालों की तैयारी और काफी प्रयासों को खर्च करना पड़ता है, लेकिन हिमांशु ने यूपीएससी की तैयारी अपने कॉलेज लास्ट यर में शुरू की थी। जिसके दो साल बाद उन्होंने इस परीक्षा को टॉप किया। इसके पीछे की स्ट्रेटजी पर बात करते हुए वो बताते हैं कि किसी भी IAS एसपीरेंट को तैयारी के लिए किताबों का जमावड़ा लगाने की जरूरत नहीं है, ऐसा करके हम और भी अपने आपको उलझा ही रहे होते हैं। उनका कहना है कि सीमित किताबों और स्टडी प्लेटफॉर्म से ही पढ़ाई करें।

अपनी तैयारी के दौरान हिमांशु ने गवर्नमेंट वेबसाइट्स से काफी मदद ली। अपने सारे फैक्ट्स आदि उन्होंने वहीं से उठाए। ठीक इसी प्रकार टीवी प्रोग्राम्स और डिबेट्स से भी उन्हें काफी लाभ मिला। निबंध का जरूरी मैटर उन्हें यहीं से मिला।

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