गोबर के ऊपले थाप रही थी मां खबर आई कि बेटी IAS बन गई है

New Delhi :  साल था 2018 और वह दिन बाकी दिनों की तरह एक सामान्‍य-सा दिन था। हरियाणा के सोनीपत में अपनी मां के घर 32 साल की अनु कुमारी रोज की तरह घर के कामों में व्‍यस्‍त थी। 4 साल का बेटा ऊधम मचा रहा था और अनु उसके पीछे-पीछे दौड़ रही थी। अनु की मां गोबर के उपले पाथ रही थी, दिन बीत रहा था कि तभी यह खबर आई कि अनु IAS बन गई है।

जी हां ये कहानी है 2018 में IAS की परीक्षा में सेकेंड टॉपर रही अनु कुमारी की। अनु के लिए UPSC क्लीयर करना आसान नहीं था लेकिन नामुमकिन भी नहीं। इस लड़की ने जब आईएएस बनने की ठानी तो पढ़ाई का तरीका ऐसा चुना, सब दंग रह गए।

मन में कुछ करने का जज्बा होता है तो उसे मंजिल तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता है। ऐसा ही कुछ यूपीएससी 2017 की सेकेंड टॉपर सोनीपत के विकास नगर की अनु कुमारी ने करके दिखाया है। अनु ने आईएएस बनकर देशसेवा का सपना बचपन में देखा था। लेकिन इस सपने के पूरा होने से पहले उसकी शादी हो गई तो एक बच्चा भी।

इसके बावजूद अनु ने हिम्मत नहीं हारी। परिवार ने सहयोग किया और शादी के बाद सपने को पूरा करने की ओर कदम बढ़ाए। नौकरी छोड़ी, ढाई साल के बेटे को मां के पास छोड़ा और खुद मौसी के घर रहकर पढ़ाई की। करीब डेढ़ साल के लिए मैं अपनी ममता भूल गई थी, लेकिन जो करने की ठानी थी, वह पूरी हो गई और मेरा सपना साकार हो गया।

अनु के पिता बलजीत सिंह मूलरूप से पानीपत के दिवाना गांव के रहने वाले है, लेकिन वह कई साल पहले हॉस्पिटल में एचआर की नौकरी करने के कारण सोनीपत के विकास नगर में आकर बस गए। अनु की 12वीं तक की पढ़ाई सोनीपत के स्कूल से की। अनु दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिन्दू कॉलेज की फिजिक्स ऑनर्स की स्टूडेंट रहीं हैं।

अनु ने आईएमटी नागपुर से एमबीए भी किया है। अनु पिछले 9 साल से गुड़गांव में एक प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनी में नौकरी कर रही थी, लेकिन एग्जाम की तैयारी के लिए दो साल पहले नौकरी छोड़ दी। अनु बताती है कि उन्होंने पहले भी यूपीएससी का प्री एग्जाम दिया था, लेकिन उस समय एग्जाम का सिर्फ तरीका देखा था। अब मैंने एग्जाम पूरी तैयारी के साथ दिया था।

अनु बताती हैं कि नौकरी अच्छी थी, लेकिन मुझे अंदर से संतुष्टी नहीं मिल रही थी। मैं लोगों के लिए कुछ करना चाहती थी, इसलिए मैंने यूपीएसएसी क्लीयर करने का सपना पूरा करने की ठानी। मैंने कोई कोचिंग नहीं ली और खुद से पढ़ाई करके ही यह मुकाम हासिल किया। बस कभी अपने लक्ष्य का पीछा करना नहीं छोड़ा और सफलता हाथ लगी।