तुम्हारे भाई का केस कोर्ट में आ जाए तो क्या करोगी…किसान की बेटी ने दिया ऐसा जवाब कि जज बन गई

New Delhi : जीवन आपकी कोर्ट में रिश्तेदार या परिचित का केस आए तो क्या करेंगी? जवाब था-दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर कर दूंगी या खुद केस से हट जाऊंगी। मप्र हाईकोर्ट की सिविल जज की परीक्षा में बैठने वाली किसान की बेटी किरण मलिक के इस जवाब ने उन्हें जज बना दिया। जी हां 12 जनवरी को सिविल जज की परीक्षा का रिजल्ट आया और किसान की बेटी किरण मलिक उसमें पास कर गईं। हम आज आपको उनकी कहानी बता रहे हैं।

पिता किसान, खेती से करते हैं पालन-पोषण : सिविल जज के लिए चुनी गईं किरण मलिक के पिता सतीश मलिक किसान हैं। सिंगोली में जमीन है उसी पर खेती कर होने वाली इनकम से परिवार का पालन-पोषण करते हैं। किरण बताती हैं उन्होंने 10वीं तक की शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर और हायर सेकंडरी कन्या हायर सेकंडरी स्कूल सिंगोली में कंप्लीट किया। 10वीं बोर्ड के बाद ही देश की सेवा का लक्ष्य बनाया।

पुलिस से रिटायर दादा से मिली प्रेरणा, 5 घंटे रोज पढ़ी : किरण कहती हैं देश सेवा की बात सुनकर मेरे दादा रिटायर हेड कांस्टेबल नवाबसिंह मलिक ने प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद जज बनने की ठानी। 12वीं के बाद नीमच कॉलेज में बीए और ज्ञान मंदिर लॉ कॉलेज से एलएलबी की।

एलएलबी फाइनल वर्ष से ही कोचिंग लेना शुरू कर दी। मई 2017 में एलएलबी पास करने के बाद सिविल जज की तैयारी में जुट गईं। रोज पांच घंटे पढ़ाई के लिए निर्धारित किए। तैयारी के लिए कई किताबें पढ़ीं और इस मुकाम को हासिल किया।

पति और ससुर बैंक मैनेजर : किरण की शादी नवंबर 2015 में मोरवन निवासी अमृतराम जाट के सुपुत्र महिपाल सिंह से हुई थी। अमृतराम बैंक आफ इंडिया खलघाट की शाखा के मैनेजर हैं। जबकि पति महिपाल भी झाबुआ ग्रामीण बैंक में मैनेजर पद पर हैं।
पति और ससुर दोनों ने किरण का हमेशा हौसला बढ़ाया। पढ़ाई के दौरान किरण के सामने कई परेशानियां भी आईं पर हिम्मत नहीं हारी। सिविल जज में चयन के बाद किरण के सिंगोली आने पर परिवार और नगरवासियों ने बस स्टैंड पर ढोल-नगाड़ों से स्वागत किया और जुलूस के साथ घर ले गए। जहां लोगों ने बधाई दी।

इन सवालों के दिए जवाब : एलएलबी के बाद किरण ने इंदौर-जबलपुर में कोचिंग लेकर सिविल जज एग्जाम की तैयारी की। 29 सितंबर 2018 को प्री एग्जाम दिया और मप्र हाईकोर्ट की 24 व 25 नवंबर को मुख्य परीक्षा में बैठीं। इसमें किरण ने सफलता प्राप्त की। 6 जनवरी को जबलपुर में हाईकोर्ट के जज सुजॉय पाल और मंदिरा दुबे ने साक्षात्कार लिया। उनका पहला सवाल था जज क्यों बनना चाहती हो? किरण ने जवाब दिया- बचपन में देश सेवा के लिए इसी क्षेत्र में आने का सपना देखा था। दूसरा सवाल की अगर आपकी कोर्ट में ऐसा केस आ जाए जिसमें की आरोपी आपका भाई, रिश्तेदार या परिचित हो तो आप कैसे उस केस को हल करेगी? किरण बोलीं- या तो उस केस को दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर कर देगी या खुद ही उस केस से अलग हो जाएंगी। इन जवाबों से दोनों जज प्रभावित हुए और 12 जनवरी को साक्षात्कार का परिणाम आया। इसमें किरण सिविल न्यायाधीश वर्ग 2 बन चुकी थीं।