शहीद हरि सिंह : एक फौजी का बेटा,जो कड़ी मेहनत करके फौजी बना और देश के लिए जान दे दी

New Delhi : आज हम आपको एक फौजी के बेटे की कहानी बता रहे हैं जो कड़ी मेहनत करके सेना में शामिल हुआ और देश के लिए शहीद हो गया। फरवरी में कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों के साथ हुए एनकाउंटर में हरी सिंह शहीद हो गए थे। वे 55 राष्ट्रीय राइफल्स में थे।

हरि सिंह की दो साल पहले राधा से शादी हुई थी। दोनों का एक 10 महीने के बेटा समागम भी है। हरि सिंह सैनिक परिवार से था। उनके पिता अगड़ी राम भी भारतीय सेना से रिटायर्ड थे। उनकी लगभग 2 साल पहले ही मौत हुई थी। हरि सिंह तीन बहनों का इकलौता भाई था।

शहीद हरिसिंह को याद करते हुए उनके दोस्तों की आंखें नम हो जाती हैं। उनकी माने तो हरिसिंह बचपन से ही न सिर्फ हंसमुख और बड़ा ही जुझारू था, बल्कि उसमे देशभक्ति को लेकर बड़ा भारी जज्बा भी था और सेना में भर्ती होने के लिए वह सुबह शाम घण्टों पसीना बहाता था। भर्ती के दौरान जब उसका मेडिकल आया तो सिर से पिता का साया उठ गया, लेकिन उसने हार नहीं मानी और आखिर अपना मुकाम हासिल कर ही लिया।

दोस्तों ने बताया कि हरिसिंह जब भी छुट्टी आता था, तो अधिकांश समय अपने दोस्तों के साथ व्यतीत करता था तथा इतना मिलनसार था कि गांव का हर व्यक्ति उसे देखकर खुश हो जाता था, जिससे हर कोई उसे प्यार करता था। छोटे बच्चों से उसे बड़ा भारी लगाव था। वह गांव के युवाओं को भी सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करता था। ग्रामीणों के मुताबिक इस गांव के हर से एक युवक सेना में तैनात है और यहां तक कि कई घरों में तो 2 से 3 युवक तक सेना में रहकर देश को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्हें दुख भी है और गर्व भी है कि हरिसिंह आज उनके बीच नहीं है।