पिता ने चौकीदार करके बेटे को पाला..बेटे ने भी IRS अधिकारी बनकर चौड़ा कर दिया पिता का सीना

New Delhi : साल 2015 में यूपीएससी द्वारा आयोजित की गई सिविल सेवा परीक्षा में कुलदीप द्विवेदी की अखिल भारतीय रैंक 242 रही। लखनऊ विश्वविद्यालय में सुरक्षा गार्ड का काम करने वाले पिता के बेटे कुलदीप द्विवेदी ने यह साबित कर दिया कि अगर आपमें सफल होने की इच्छाशक्ति है तो कोई भी परेशानी आपको रोक नहीं सकती।

कुलदीप के  पिता सूर्यकांत द्विवेदी लखनऊ विश्वविद्यालय में सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम करते हैं। पिता ने चौकीदारी करके अपने बेटे को एक अधिकारी बनाकर खड़ा कर दिया। कुलदीप द्विवेदी ने 2009 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया था और 2011 में अपने पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने साबित कर दिखाया कि कड़ी मेहनत किसी भी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करती बल्कि खुद की क्षमताओं पर भरोसा करना सबसे महत्वपूर्ण है। उनकी सफलता दृढ़- संकल्प एवं लक्ष्य पर केंद्रित मन और पिता के प्रयासों का उदाहरण है। इन्होंने अपनी गरीबी को पीछे छोड़ते हुए सफलता के लिए काफी मेहनत की।

कुलदीप को अफसर बनाने के लिए पिता ने हर मुमकिन कोशिश की। खुद भूखा रहे लेकिन कभी भी अपने बच्चे को भूखे पेट सोने नहीं दिया। आखिरकार बेटे ने 2015 में आईआरएस का एग्जाम क्वालीफाई करके अपने पिता के सपने को साकार कर दिखाया। लदीप बताते है, मैं लखनऊ के बछरावां का रहने वाला हूं। पिता सूर्यकान्त द्विवेदी एलयू के गेट नंबर 4 पर गार्ड कि नौकरी करते है। मां हाउस वाइफ है। हम तीन भाई और एक बहन है। पापा ने परिवार का खर्च चलाने के लिए 1991 में एलयू में गार्ड की नौकरी शुरू की। उन्हें तब 1100 रूपए सैलरी मिलती थी।

मुश्किल से परिवार का गुजारा हो पाता था। बच्चे बड़े होने लगे तो उनकी एजुकेशन की टेंशन बढ़ने लगी। हमारी जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें खेत में काम करने के अलावा गार्ड की नौकरी करनी पड़ी। 2015 में मैंने आईएएस का एग्जाम दिया था और इसे कवालीफाई कर गया था। आईएएस के एग्जाम में मेरी 242 वीं रैंक आई थी। मेरे रैंक के हिसाब से मुझें आईआरएस मिला।