पहले प्रयास में प्री भी नहीं हुआ क्लियर, फिर नौकरी करते हुये दी परीक्षा, बनें IAS टॉपर

New Delhi : 2019 की सिविल सेवा परीक्षा जिसका परिणाम इस साल के अगस्त महीने में आया, इस परीक्षा में दूसरी रैंक के साथ टॉप करने वाले जतिन किशोर की कहानी आज हम आपको बताने जा रहे हैं। जतिन किशोर ने जब पहली बार ये परीक्षा दी थी तो वो प्री तक क्लियर नहीं कर पाए थे, लेकिन जब उन्होंने दूसरे प्रयास में फिर से परीक्षा दी तो ऑलओवर दूसरी रैंक लाकर वो IAS टॉपर बन गए। सिर्फ यही नहीं उन्होंने ये कामयाबी एक सरकारी नौकरी करते हुए हासिल की है। जतिन ने मीडिया के साथ बात-चीत में 3 बेहद जरूरी सवालों के जवाब दिए पहला कि तैयारी को किस तरह करें कि सफलता मिले। दूसरा नौकरी के साथ टाइम मैनेज कैसे करें। तीसरा अगर कोचिंग नहीं लेना चाहते हैं तो कैसे पढ़ाई करें। जतिन की सफलता की प्रेरणादायी कहानी दूसरों को भी सीख देने वाली है।

जतिन किशोर मूल रूप से दिल्ली की ही रहने वाले हैं उनकी प्राथमिक से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन की सारी पढ़ाई दिल्ली से ही हुई है। जतिन आर्थिक दृष्टि से सक्षम एक पढ़े लिखे परिवार से आते हैं। उनके पिता ललित किशोर आयकर विभाग में हैं और मां शिक्षिका हैं। जतिन बचपन से ही एक ब्राईट स्टूडेंट रहे हैं। उन्होंने दिल्ली के बिरला विद्या निकेतन से 12वीं तक की। 12वीं में अच्छे अंक आने की वजह से उनका दाखिला सेंट स्टीफन कॉलेज में हो गया। यहां से उन्होंने अर्थशास्त्र में अपना स्नातक पूरा किया। इसके बाद दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उन्होंने अर्थशास्त्र में ही मास्टर्स की। अर्थशास्त्र से स्नातक फिर परास्नातक करने के बाद इस विषय पर उनकी अच्छी पकड़ हो गयी थी। यही कारण रहा कि उन्होंने सिविल सेवा में भी इसी विषय को करियर के रूप में चुनने का फैसला किया। उन्होंने इसे अपना ऑप्शनल सब्जेक्ट भी बनाया।
जतिन सिविल सेवा परीक्षा को बेहद खर्चीली और मेहनत वाली परीक्षा मानते हैं इसलिए छात्रों को वो सलाह देते हैं कि इस परीक्षा को लाईटली बिल्कुल न लें। परीक्षा का पहला अटेम्प्ट देने से पहले ही अपना बेस मजबूत कर लें। इसके लिए वो ग्रेजुएशन से ही तैयारी करने की सलाह देते हैं। जतिन ने परीक्षा की तैयारी के लिए सिर्फ जनरल स्टडीज के लिए ही कोचिंग ली थी, इसलिए वो कोचिंग को ज्यादा महत्व नहीं देते। उनकी सलाह है कि कोचिंग के बजाए विद्यार्थी मॉक टेस्ट सीरीज जॉइन कर सकते हैं जिसे वो अपनी हर सब्जेक्ट की तैयारी के बाद दे सकते हैं। बता दें उन्होंने इंडियन इकोनॉमिक सर्विस की ट्रेनिंग में रहते हुए ये अटेम्पट दिया और 2018 में यूपीएससी द्वारा आयोजित इंडियन इकोनॉमिक सर्विस यानी ‘ IES ‘ की परीक्षा में रैंक 1 हासिल किया था। जतिन फिलहाल ‘ मिनिस्ट्री ऑफ रूरल डेवलपमेंट ‘ में अस्सिटेंट डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने अपना दूसरा प्रयास नौकरी करते हुए ही दिया। इस विषय में उनका कहना है कि उन्होंने काफी पहले से अपना बेस बनाना शुरू कर दिया था इसीलिए उन्हें नौकरी करते हुए अपनी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं देना पड़ा।

उनकी छात्रों के लिए भी यही सलाह है कि अगर वो नौकरी करते हुए ही इस परीक्षा को निकालना चाहते हैं तो बेस पहले से बनाइए और टाइम मैनेजमेंट का बेहद खयाल रखिये। अपनी पढ़ाई में निरंतरता लाइये। साथ ही कंटेंट पर ज्यादा ध्यान दीजिए।

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