देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए पिता, बेटी ने कहा-पापा स्टार बन गए हैं, मैं भी फौजी बनूंगी

New Delhi  :  ये कहानी है उत्तराखंड के लाल शहीद दीपक नैनवाल की। शहीद की पांच साल की बेटी लावण्या को वो नारे अब तक याद हैं जब तक सूरज चांद रहेगा, दीपक तेरा नाम रहेगा। शहीद की प्यारी सी बेटी कहती है कि ‘मेरे पापा स्टार बन गए हैं’। शहीद का बेटा कहता है कि जिसने पपा को मारा, मैं उसे छोड़ूंगा नहीं। रेयांश की दादी जब उसे देखती है, तो कहती है कि दीपक भी तो ऐसा ही था।

दीपक नैनवाल दस अप्रैल 2018 की रात जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान घायल हो गए थे। वो सीने में 2 दो गोलियां लगने के बाद भी 17 घंटों तक आतंकियों से लड़ते रहे थे। शरीर में दो गोलियां धंस गई थी, फिर भी इस वीर ने हार नहीं मानी। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 20 मई को एक लंबी जद्दोजहद के बाद दीपक अपनी जिंदगी से हार गए थे। शहादत को करीब 1 साल हो चुका है।

शहीद दीपक नैनवाल के पिता चक्रधर नैनवाल भी फौज से रिटायर हैं। उनकी तीन पीढिय़ां देश सेवा से जुड़ी रहीं। श्री चक्रधर नैनवाल 10-गढ़वाल राइफल में थे। इस दौरान उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध समेत कई युद्धों में हिस्सा लिया है। दीपक नैनवाल अपने पीछे पत्नी को भी छोड़ गए हैं, जो अक्सर खामोश ही रहती हैं।

बताया जाता है कि जिस दिन दीपक नैनवाल को गोली लगी थी, उसके दो दिन बाद ही उन्हें छुट्टी पर घर वापस लौटना था। ये कैसी किस्मत है कि दीपक नैनवाल घर आए लेकिन तिरंगे में लिपटकर आए। 15 अगस्त नज़दीक है और ऐसे वीर सपूतों को याद करना हमारा फर्ज है, जिन्होंने अपनी जान की परवाह ना करते हुए देश की रक्षा के लिए सब कुछ बलिदान कर दिया। दीपक नैनवाल भी अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़कर चले गए।