अगर कोई आपका करता है अपमान तो शांत रहिए..खुद ही हार जाएगा अपमान करने वाला

New Delhi : पुराने लोक कथा के अनुसार किसी राज्य में एक महान पहलवान था। वह दंगल में कभी भी किसी से नहीं हारा था। अब वह बूढ़ा हो गया था, लेकिन बुढ़ापे में भी वह बहुत शक्तिशाली था। उससे देश-विदेश के कई युवा युद्ध और दंगल के कौशल का प्रशिक्षण लेने आते थे। एक दिन एक बदनाम युवा पहलवान उसके गांव आया।

वह उस महान योद्धा को हराने का संकल्प लेकर आया था, ताकि ऐसा करने वाला पहला व्यक्ति बन सके। ताकतवर होने के साथ ही उसकी खूबी दुश्मन की कमजोरी पहचानना थी और उस कमजोरी का फायदा उठाने में उसकी महारत थी। जब दुश्मन की कमजोरी उसे मालूम हो जाती तो वह पूरी निर्ममता, ताकत और बिजली की गति से वार करता था। पहला वार तो उसका दुश्मन करता, लेकिन आखिरी वार इस युवा युद्धा का ही होता था। युवक ने बूढ़े योद्धा को दंगल के लिए ललकारा। शिष्य और शुभचिंतकों ने बूढ़े योद्धा को समझाया कि वह इस लड़के से युद्ध न लड़े, क्योंकि वह बहुत चतुर है और ताकतवर भी है।

वृद्ध पहलवान ने सभी की सलाह को नजरअंदाज करते हुए युवा युद्धा की चुनौती कबूल कर ली। जब दोनों आमने-सामने आए तो युवा पहलवान ने महान योद्धा को अपमानित करना शुरू किया। उसने बूढ़े योद्धा के ऊपर रेत-मिट्टी फेंकी। चेहरे पर थूका भी। इस तरह वह घंटों तक बूढ़े योद्धा को गालियां देता रहा। जितने तरीके वह जानता था, उतने तरीके से वृद्ध को अपमानित किया। लेकिन बूढ़ा पहलवान शांत रहा। युवा लड़ाका थकने लगा। अंत में अपनी हार सामने देखकर वह बिना लड़े ही शर्मिंदगी के मारे भाग खड़ा हुआ।

बूढ़े योद्धा के कुछ शिष्य इस बात से नाराज और निराश हुए कि उनके गुरु ने चालाक युद्धा से युद्ध नहीं किया। उसे सबक नहीं सिखाया। शिष्यों ने अपने गुरु से सवाल पूछा कि आप इतना अपमान कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं? आपने उसे भाग जाने का मौका कैसे दे दिया? महान योद्धा ने जवाब दिया कि अगर कोई व्यक्ति आपके लिए कुछ उपहार लेकर आए, लेकिन आप लेने से इनकार कर दें। तब यह उपहार किसके पास रह गया? अपमान गिलास में भरी शराब की तरह है। ये आपको तब ही नुकसान पहुंचा सकती है, जब आप स्वीकार कर लें यानी इसे पिएं। अगर कोई आपका अपमान करता है तो आपको शांत ही रहना चाहिए। जब आप कुछ ग्रहण ही नहीं करेंगे और बदले उसे कुछ नहीं कहेंगे तो अपमान करने वाला व्यक्ति स्वयं ही हार जाएगा।