अब नक्सलियों का सफाया करेंगी महिला कमांडो..जंगलों में पहली बार उतारी गई महिला कमांडो फोर्स

New Delhi : नक्सली अब नहीं बचेंगे। नक्सलियों का सफाया अब भारत की नारी शक्ति करेगी। जी हां नक्सलियों से भिड़ने के लिए महिला कमांडो फोर्स को जंगलों में उतारा गया है। इस फोर्स को दंतेश्वरी फाइटर्स नाम दिया गया है।

जी हां नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा में पहली बार ऐसा होगा जब फोर्स की महिला और स्थानीय महिला पुलिस की टीम नक्सल मांद में घुस नक्सलियों से सीधा मुकाबला करेगी। दन्तेवाड़ा पुलिस ने 30 महिला कमांडो का विशेष दस्तां तैयार किया है। जिसका नाम दंतेश्वरी फाइटर्स रखा गया है। इस टीम का नाम बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के नाम पर दंतेश्वरी लड़ाके रखा गया है।

हाल ही में दंतेवाड़ा में CRPF बस्तरिया महिला बटालियन की एक कंपनी भी दन्तेवाड़ा में तैनात की गई है। इस टीम में भी 30 महिला कमांडो हैं। इन दोनों टीमों को मिलाकर कुल 60 कमांडो 2 महिला अधिकारी दिनेश्वरी और आस्था के नेतृत्व में जंग के मैदान में जल्द ही उतरेगी।

साल भर पूर्व सीआरपीएफ ने बस्तर में माओवादियों से मुकाबला करने के लिए बस्तर के युवाओं की अलग कंपनी बनाई थी। जिसका नाम बस्तरिया बटालियन रखा गया था। इस बटालियन में बस्तर के सैकड़ो युवक-युवतियां भर्ती हुए। जिन्होंने अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली है। वहीं इसी बटालियन से ट्रेनिंग के बाद 30 ऐसी युवतियों को चुना गया है जिन्होंने माओवाद को बहुत करीब से देखा है और यहां के जल, जंगल और जमीन से भी भली भांति वाकिफ हैं। मैदानी इलाके में अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ये 30 कमांडो दन्तेवाड़ा वापस लौटी हैं और यहां इन्हें बस्तर के जंगलों के बीच माओवादियों से लड़ने की तैयारी कराई जा रही है।

वहीं दंतेवाड़ा एसपी डॉ अभिषेक पल्लव के मार्गदर्शन में महिला डीआरजी की टीम भी तैयार की जा रही है। अब तक दंतेवाड़ा में केवल पुरुष डीआरजी की 5 टीम थी, लेकिन अब 6वीं महिला डीआरजी को मैदान में उतारा जा रहा है।

महिला कमांडो की टीम बनाने का मुख्य मकसद महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के अलावा ऐसी लड़कियों को रोजगार देना भी था, जिन्होंने बचपन से माओवादियों की प्रताड़ना को अपनी आंखों से देखा है। जिन्होंने अपना घर नक्सलियों के हांथो टूटते देखा है। इनमें से कई ऐसी महिलाएं हैं जो कभी नक्सल प्रताड़ना झेल चुकी हैं, कई महिलाओं के पिता या पति को नक्सलियों ने मौत के घाट उतार दिया था। उनका बदला लेने के लिए अब ये महिलाएं नक्सलियों के खिलाफ मोर्चा लेने तैयार हो गई हैं। इतने सालों तक प्रताड़ना झेलने के बाद अब इनकी आंखों में नक्सलियो के विरुद्ध एक अलग सी ज्वाला देखने को मिल रही है