सुप्रीम फैसले से अर्नब जेल से बाहर- गिरफ्तारी से बचने को फिर गये कोर्ट, कंगना रनौत झूमकर नाचीं

New Delhi : बुधवार शाम को रिपब्लिक न्यूज चैनल के मालिक पत्रकार अर्नब गोस्वामी मुंबई की तलोजा जेल से बाहर चले आये। उनके आने पर उनके समर्थक झूम उठे। बॉलीवुड कंगना रनौत अपनी भाई की शादी में इस खबर के मिलने के बाद खूब झूमीं। दूसरी तरफ रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक और उनकी पत्नी समीब्रता रे ने अलीबाग पुलिस पर धावा बोलने के आरोप में उनके खिलाफ दर्ज एक दूसरे आपराधिक मामले में गिरफ्तारी से पहले जमानत लेने के लिये मुंबई की एक अदालत का रुख किया है। बता दें कि अर्नब को पुलिस ने 4 नवंबर को उनके घर से गिरफ्तार किया था।

अर्नब गोस्वामी को अलीबाग पुलिस ने 4 नवंबर को 53 वर्षीय इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक और उसकी मां कुमुद के 2018 के एक मामले में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के समय अर्नब और उनकी पत्नी ने पुलिस के सदस्यों पर मारपीट करने का आरोप लगाया था। इसी दिन अर्नब को पकड़ने गई पुलिस टीक की एक महिला अधिकारी ने ने अर्नब, उनकी पत्नी और बेटे और दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मारपीट का आरोप लगाते हुये शिकायत दर्ज कराई थी।
पुलिस ने महिला अधिकारी के आरोपों पर कार्रवाई करते हुये भारतीय दंडविधान के कई प्रावधानों के तहत एक सरकारी नौकर को उसकी ड्यूटी से रोकने, जानबूझकर अपमानित करने, शांति भंग करने, आपराधिक धमकी देने और सार्वजनिक संपत्ति अधिनियम को नुकसान पहुंचाने आदि के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
गोस्वामी ने इस आरोप का खंडन किया था और कहा था कि उन्होंने केवल अपनी अवैध गिरफ्तारी का विरोध किया था। अर्नब गोस्वामी के एडवोकेट श्याम कल्याणकर ने कहा- मूल ​​धारणा यह है कि उसके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है क्योंकि गिरफ्तारी स्वयं में अवैध है। हम अपने तर्क और मामले को आगे बढ़ाने के लिये गिरफ्तारी के दौरान रिकॉर्ड किये गये वीडियो का हवाला दिया है।
अभियोजन पक्ष ने उनके अनुरोध का विरोध करते हुए अदालत के समक्ष जवाब दाखिल किया। अभियोजन पक्ष ने दावा किया है कि गोस्वामी को कानून का कोई डर नहीं था और अगर उन्हें संरक्षण दिया गया तो वे इस मामले में गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। अदालत में गुरुवार को याचिका पर सुनवाई होने की संभावना है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अर्णब गोस्वामी को अंतरिम जमानत देने के अनुरोध के बाद पूर्व गिरफ्तारी जमानत के लिए अनुरोध दायर किया गया था जिसमें अर्नब की स्वतंत्रता की रक्षा करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब को जमानत देने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आज अगर हम इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे तो हम व्यक्ति की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के विनाश के रास्ते पर चले जायेंगे। आप किसी व्यक्ति की विचारधारा को नापसंद कर सकते हैं और इसे चुनौती दे सकते हैं, लेकिन आप उसे बांध नहीं सकते। जेल में नहीं डाल सकते। हमें अब संदेश देना होगा।

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