सुप्रीमकोर्ट के ऐतिहासिक आदेश के बाद अब नहीं होती सेना के डॉग्स की ह’त्या

 New Delhi : सेना की डॉग यूनिट एक बार फिर चर्चा में है। कल योग दिवस पर राहुल गांधी ने सेना की डॉग्स यूनिट का कथित रूप से मजाक उड़ा दिया। जिसके बाद सरकार के गृहमंत्री और रक्षा मंत्री ने राहुल पर नि’शाना साधा है।

ऐसे में जरूरी है कि सेना के डॉग्स को लेकर एक जानकारी हम आपको दे दें। दरअसल पहले रिटायरमेंट के बाद सेना के डॉग्स को मा’र दिया जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं होता। साल 2015 में दिल्ली के एक वकील की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए केंद्र की मोदी सरकार को आदेश दिया था कि सेना की डॉग यूनिट से रिटायर होने के बाद कुत्तों को ना मा’रा जाए। उन्हें जिंदा रखा जाए।

क्यों मा’र देती थी सेना : यह बु’रा चलन अंग्रेजों के वक्त से ही चला आ रहा था। इंडियन आर्मी ऐसा देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए करती थी। आर्मी के लोगों को ड’र रहता था कि कहीं कुत्ते ग’लत हाथों में न पड़ जाएं। ऐसे में उनका गलत इस्तेमाल हो सकता था, क्योंकि इन एक्सपर्ट कुत्तों को आर्मी के सेफ और खू’फिया ठिकानों के बारे में पूरी जानकारी होती है।

इसके अलावा गंभीर रूप से चो’टिल हो जाने या बी’मार पड़ जाने पर भी कुत्तों के साथ ऐसा किया जाता था। यूं तो कुत्ते के साधारण बी’मा’र पड़ने पर भारतीय सेना उसका इलाज कराती हैं, लेकिन अगर उसके स्वास्थ्य में सुधार नहीं होता और उसके दोबारा पहले जैसा काम करने की संभावना नहीं दिखती तो उसे गो’ली मा’र दी जाती थी।

अब क्या होता है: सुप्रीम कोर्ट का आदेश मिलते ही भारतीय सेना ने कुत्तों को न मा’रने की हिदायत दी। यह फरमान पहुंचते ही बरेली, मेरठ, आगरा समेत सभी सैन्य क्षेत्रों में सेवानिवृत्त कुत्तों के खान-पान का ख्याल रखा जाने लगा है।

दिल्ली के वकील ने लगाई थी याचिका : दिल्ली के वकील संजय कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। इसमें सेना के नियमों का हवाला देते हुए बताया गया कि सेवानिवृत्ति के बाद कुत्तों को मा’र दिया जाता है। याचिका पर मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर और जस्टिस जयंत नाथ की खंडपीठ ने सुनवाई की। इसमें सेवानिवृत्ति के बाद कुत्तों को न मा’रने का फैसला सुनाया गया। यह फैसला भारतीय सेना ने सभी सैन्य क्षेत्र को भेज दिया।

दस साल बाद सेवानिवृत्ति : सेना अफसरों के मुताबिक, सेना में कुत्ते दस एवं साढ़े दस साल तक और घोड़े 20 से 25 साल तक नौकरी करते हैं। इसके बाद सेवानिवृत्त हो जाते हैं। नौकरी पूरी होने के बाद पहले कुत्तों को छो’ड़ दिया जाता था, मगर वे फिर सैन्य क्षेत्रों में लौट आते थे। इसलिए इन्हें इंजेक्शन लगाकर मा’रा जाने लगा।