ये है असली भक्ति : बैसाखियों के सहारे बाबा अमरनाथ के दर्शन करने गया भक्त

New Delhi : बम-बम भोले के जयघोष के साथ दसवें दिन 9307 शिव भक्तों ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए। इसके साथ दर्शनार्थी यात्रियों का आंकड़ा 130503 तक पहुंच गया है। एक भक्त तो बैसाखियों के सहारे बाबा के दर्शन करने गया।

पवित्र हिमलिंग के दर्शन के लिए रोजाना देशभर से हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इस बीच आधार शिविर भगवती नगर जम्मू से कड़ी सुरक्षा के बीच 222 छोटे बड़े वाहनों में 5273 तीर्थ यात्रियों का जत्था घाटी के लिए रवाना हुआ। इसमें 4086 पुरुष, 973 महिलाएं, 26 बच्चे और 188 साधु शामिल रहे। यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में जोश और उत्साह बरकरार है।

इस गुफा में हर साल प्राकृतिक रूप से शिवलिंग का निर्माण होता है जिसके दर्शन करने के लिए देश-विदेश से भोले के भक्त आते हैं। मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने माता पार्वती को इसी गुफा में बैठकर अमरत्व की कथा सुनाई थी। इस कारण से इस गुफा का इतना महत्व है। इस गुफा में हर साल प्राकृतिक रूप से ठोस बर्फ से शिवलिंग बनता है। शिवलिंग के अलावा पास में ही माता पार्वती और शिवपुत्र भगवान गणेश का भी बर्फ का लिंग बना हुआ होता है। अमरनाथ गुफा में बाबा भोलेनाथ जहां साक्षात विराजमान रहते हैं वहीं देवी सती का महामाया शक्तिपीठ भी है। इस स्थान पर देवी सaति का कंठ गिरा था। एक साथ एक ही स्थान पर शिवलिंग और शक्तिपीठ के दर्शन से सभी तरह की मनोकामना की पूर्ति होती है।

अमरनाथ गुफा को करीब 500 साल पहले खोजा गया था और इसे खोजने का श्रेय एक मुस्लिम, बूटा मलिक को दिया जाता है। बूटा मलिक के वंशज अभी भी बटकोट नाम की जगह पर रहते हैं और अमरनाथ यात्रा से सीधे जुड़े हैं। सबसे पहले भगवान शिव ने अपने नंदी का त्याग किया। जहां पर उन्होंने नंदी को छोड़ा उसे पहलगाम जाता है। अमरनाथ गुफा की यात्रा यहीं से आरम्भ होती है। इसके बाद अपनी जटा से चंद्रमा को मुक्त किया था। जहां पर चंद्रमा का त्याग किया वह चंदनवाणी कहलाती है।इसके बाद भगवान शंकर ने गले में धारण सांपों को छोड़ा। यह स्थान शेषनाग कहलाई गई। इसके बाद शिवजी ने गणेशजी को महागुणस पर्वत पर छोड़ दिया, महादेव ने जहां पिस्सू नामक कीडे़ को त्यागा, वह जगह पिस्सू घाटी है।

अमरकथा के दौरान कबूतरों को एक जोड़ा भी मौजूद था जो अमरकथा सुना रहा था और बीच-बीच में गूं-गूं की आवाज निकाल रहे थे। महादेव को लगा पार्वती कथा सुन रही हैं। अमरकथा सुनने से कबूतर अमर हो गए। गुफा में आज भी कबूतरों का जोड़ा दिखाई देता है। मान्यता है कि आज भी इन दो कबूतरों के दर्शन भक्तों को होते हैं।