16 हजार 368 आ’तंकियों को ठिकाने लगा चुके हैं गाजी को मा’रने वाले ये जवान…पढ़कर गर्व होगा

New Delhi :  पुलवामा में शहीद हुए जवानों के बलिदान का सेना बदला ले रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड कामरान उर्फ गाजी राशिद को मा’रा जा चुका है। यह ऑपरेशन सीआरपीएफ, भारतीय सेना एक शाखा 55 राष्ट्रीय राइफल्स (RR) और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के साथ मिलकर चला रही है। जानिए राष्ट्रीय राइफल्स के बारे में खास बातें।

कब किया गया था गठन : राष्ट्रीय राइफल्स आर्मी की काउंटर इन्सर्जेंसी यूनिट (आ’तंकवाद रोधी इकाई) है, जो अब तक 16 हजार से भी ज्यादा आं’तकवादियों को ठिकाने कर चुकी है। इस यूनिट का गठन 1 अक्टूबर 1990 किया गया था। शुरुआत में राष्ट्रीय राइफल्स को जम्मू-कश्मीर के साथ ही पंजाब में भी आ’तंकवाद को निष्प्रावी करने के लिए नियुक्त किया गया था। हालांकि बाद में सिर्फ जम्मू-कश्मीर की ही जिम्मेदारी राष्ट्रीय राइफल्स को दी गई। राष्ट्रीय राइफल्स का गठन 1990 में उस दौर में किया गया था, जब कश्मीर घाटी में लोकल एजेंसियां लॉ एंड ऑर्डर को मेंटेन नहीं कर पा रही थीं। RR का आदर्श वाक्य ‘दृढ़ता और वीरता’ है।

कितनी ताकतवर है RR: जिन 16,368 आ’तंकवादियों को राष्ट्रीय राइफल्स ने निष्प्रभावी बनाया है, उनमें 8522 को मौत के घाट उतारा, 6737 को पकड़ा और 1109 को सरेंडर करवाया। आरआर को अभी तक 6 अशोक चक्र, 34 कीर्ति चक्र, 221 शौर्य चक्र और 1508 सेना मेडल मिल चुके हैं। जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स के चार हेडक्वार्टर हैं।

अब 65 बटालियंस हैं : शुरुआत में राष्ट्रीय राइफल्स ने 36 बटालियंस के साथ काम शुरू किया था। बाद में बटालियंस की संख्या बढ़ती गई। इसमें ऐसे सैनिकों को नियुक्त किया जाता है, जिन्हें घाटी में ऑपरेशनल एक्सपीरियंस होता है। अभी राष्ट्रीय राइफल्स में 65 बटालियंस हैं। कश्मीर में 12 अलग-अलग सेक्टर में यह फोर्स काम करती है। आरआर को शुरुआत में घाटी के साथ ही पंजाब के भी कुछ आंतकग्रस्त इलाकों में नियुक्त किया गया था। दोनों ही जगह राष्ट्रीय राइफल्स ने आंतकियों का सफाया करने का काम किया। पंजाब में खालिस्तान मूवमेंट के विद्रोह को रोकने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई।