अरविंद शर्मा के पार्टी में स्वागत की फाइल फोटो। Image Source : twitter

क्या शर्मा जी की इंट्री बदल देगी पूर्वांचल की तस्वीर, क्योंकि मंत्रिमंडल के रास्ते तो बंद हो गये

New Delhi : भाजपा ने शनिवार को नौकरशाह से नेता बने एके शर्मा को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक फेरबदल के तहत उत्तर प्रदेश इकाई का उपाध्यक्ष नियुक्त किया। पार्टी ने राज्य में विभिन्न मोर्चों के लिए नये प्रमुखों की घोषणा की। यह सुनिश्चित किया गया कि विभिन्न क्षेत्रों और जातियों को प्रतिनिधित्व मिले। पॉलिटिकल साइंस में फर्स्ट क्लास से मास्टर डिग्री और वीआरएस प्राप्त ब्यूरोक्रेट शर्मा जी का जन्म उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में 11अप्रैल 1962 को हुआ था। वह भूमिहार समुदाय से आते हैं। उनके पिता का नाम शिवमूर्ति राय है। यूपी भाजपा में अब दो नये महासचिव लखनऊ से अर्चना मिश्रा और बुलंदशहर जिले से अमित वाल्मीकि हैं। मिश्रा वर्तमान में महिला मोर्चा की महासचिव हैं।

वैसे शर्मा जी के लिहाज से ये उनका डिमोशन ही माना जायेगा। अभी हाल तक पीएमओ में वो गजब की पॉवर इन्जॉय कर रहे थे। वहां से नौकरी छोड़कर आये तो सबको लगा कि कुछ विशिष्ट होगा। फिर कम से कम उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में शामिल करने की चर्चाएं हुईं लेकिन इस नई नियुक्ति से साबित हो गया है कि पर कट गये हैं और हाथ में झुनझुना हे। हालांकि इस फेरबदल के बाद पार्टी यह मानकर चल रही है कि ब्राहमण भूमिहार खुश होंगे। खासकर शर्मा जी की वजह से पूर्वांचल के भूमिहार पार्टी को तो अपना मानकर चलेंगे ही। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाने वाले शर्मा हाल ही में एमएलसी बने हैं। वे मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में और उसके आसपास कोविड की स्थिति और आवश्यकताओं की देखभाल कर रहे हैं। वह पूर्वी उत्तर प्रदेश के मऊ के रहने वाले हैं। शर्मा ने ट्वीट किया- पार्टी के राष्ट्रीय और राज्य नेतृत्व को बहुत-बहुत धन्यवाद। वरिष्ठों के मार्गदर्शन में और साथी कार्यकर्ताओं के समर्थन से, मैं समाज, राज्य और देश की सेवा में लगा रहूंगा।
सूत्रों ने कहा कि मोर्चा के प्रमुख के लिए संगठनात्मक पदों पर काम करने वाले नेताओं को महत्व दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि इन मोर्चा के प्रमुखों की नियुक्ति दिल्ली के वरिष्ठ नेताओं की हालिया यात्रा के दौरान पार्टी नेताओं द्वारा उठाये गये मुद्दों में से एक थी। बी एल संतोष के नेतृत्व में वरिष्ठ नेताओं को आयोगों के प्रमुखों की नियुक्तियों से भी अवगत कराया गया था। पिछले दो दिनों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग तथा अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के महत्वपूर्ण पद भरे गये हैं। फर्रुखाबाद से प्रंशुदत्त द्विवेदी, राज्य सचिव, को भाजपा युवा मोर्चा का प्रमुख बनाया गया है। राज्यसभा सांसद और पुराने संगठनात्मक हाथ गीता शाक्य, औरैया से ओबीसी नेता, महिला मोर्चा की नई प्रमुख हैं। गोरखपुर से कामेश्वर सिंह, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी माने जाते हैं और राज्य सचिव हैं, अब पार्टी के किसान मोर्चा के प्रमुख होंगे। कामेश्वर ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत एबीवीपी से की थी और वह भाजपा युवा मोर्चा के साथ-साथ राज्य कार्यसमिति के सदस्य भी रहे हैं।
बहरहाल बात शर्मा जी की। यह शर्माजी कोई और नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी आईएएस अफसर अरविंद कुमार शर्मा हैं, जिन्होंने वीआरएस ले लिया है। शुरुआत में तो तमाम तरह की अटकलें लगाईं गई। मोदी से उनकी नजदीकी देखकर कभी उन्हें राज्यपाल बनाये जाने की हवा तैरी तो कभी उनको सीएम तक बना देने की अफवाह। गुजरात कैडर के आईएएस अरविंद कुमार शर्मा के रिटायरमेंट में दो साल बाकी थे, उससे पहले ही पिछले साल उन्होंने वीआरएस ले लिया था। पीएम के बहुत ही खास और पसंदीदा अफसरों में शामिल अरविंद कुमार शर्मा का बीजेपी जॉइन करके यूपी की पॉलिटिक्स में आने के कयास लगाये जा रहे हैं।
अरविंद 1988 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस हैं। उन्होंने 2001 से लेकर 2013 तक नरेंद्र मोदी के साथ काम किया। उस वक्त मोदी गुजरात के सीएम थे। जब मोदी सीएम रहे तो वह उनके साथ सीएमओ में रहे। नरेंद्र मोदी पीएम बने तो अपने साथ अरविंद कुमार शर्मा को पीएमओ लेकर आ गये। 2014 में वह पीएमओ में संयुक्त सचिव के पद पर रहे। उसके बाद प्रमोशन पाकर सचिव बने। कोरोना वायरस संकट की वजह एमएसएमई की स्थिति काफी खराब हो गई थी। एमएसएमई क्षेत्र के लाखों श्रमिकों के समक्ष रोजगार का संकट पैदा हो गया। लॉकडाउन के में पलायन करके लौटे मजदूरों को रोजगार देना सबसे बड़ी चुनौति बनी। ऐसे में पीएम ने अरविंद कुमार शर्मा पर एक बार फिर से विश्वास जताया और उन्हें सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रम (एमएसएमई) मंत्रालय में सचिव के पद पर भेजा था। (Input : Live Bihar)

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