पॉलिटिक्स का सुपरस्टार : फिर साबित किया वे पार्टी के चमकते सितारे हैं, न उन्हें हराया जा सकता है, न हटाया

New Delhi: बात सताइस साल पुरानी है। जब एकाएक नये नवेले गोरखनाथ मठ के योगी सबके रहनुमा बन गये। दरअसल गोरखपुर शहर के मुख्य बाज़ार गोलघर में गोरखनाथ मंदिर से संचालित इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले कुछ छात्र एक दुकान पर कपड़ा ख़रीदने आये और उनका दुकानदार से विवाद हो गया। दो दिन बाद दुकानदार के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग को लेकर इस युवा योगी की अगुवाई में छात्रों ने प्रदर्शन किया और वे एसएसपी आवास की दीवार पर भी चढ़ गये। खबरें खूब छपी। खूब हो हल्ला हुआ। और इस आंदोलन में एक नया चेहरा सामने आया। युवा योगी आदित्यनाथ का जो आज भारतीय राजनीति का एक चमकता सितारा है। जब अजय सिंह बिष्ट ने योगी आदित्यनाथ के रूप में गोरक्षनाथ मंदिर में नाथ पंथ की दीक्षा ली थी और एक संन्यासी के रूप में अपने नये जीवन की शुरूआत की थी तो यह कोई नहीं जानता था कि यह योगी एक दिन देश के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री बनेंगे।

हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश में भाजपा में अंदरूनी विरोध के बाद जो पंचायत हुई, उसने फिर से एकबार योगी आदित्यनाथ को पार्टी में सुपरस्टार का दर्जा दे दिया है। यह साबित कर दिया है कि वे पार्टी के आम राजनेता नहीं जिसे जब चाहे हटा दिया जाये और जब चाहे बैठा दिया जाये। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी जान गया कि आज योगी का कोई विकल्प नहीं है। आखिर उत्तर प्रदेश में उनका विकल्प कौन हो सकता है? आज की तारीख में तो दूर दूर तक कोई आसपास भी नहीं दिखता। न सिर्फ प्रदेश की राजनीति में बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी बहुत कम ही लोग उनके आसपास टिकते हैं। यही कारण है कि चुनाव कहीं भी हो लेकिन भाजपा के सबसे बड़े स्टार प्रचारक योगी आदित्यनाथ ही हैं। वे पार्टी के हिंदुत्व और श्रीराम की राजनीति का दमकता चेहरा हैं। और पार्टी उनके सहारे ही आगे बढ़ रही है। आज आइये, उनके जीवन के कुछ रोचक तथ्यों को जानते हैं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज शनिवार को 49वां जन्मदिन मना रहे हैं। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के पंचूर गांव में पांच जून 1972 जन्मे अजय सिंह बिष्ट गोरखपुर पहुंचकर योगी आदित्यनाथ बन गये देश के सबसे बड़े सूबे की सत्ता के सिंहासन पर योगी विराजमान हैं। महज 26 साल की उम्र में संसद पहुंचने वाले योगी आदित्यनाथ 45 साल की उम्र में यूपी के सीएम बने। प्रदेश की नहीं बल्कि देश की सियासत में उन्हें हिंदुत्व के चेहरे के तौर पर जाना जाता है। योगी आदित्यनाथ का जन्म उत्तराखंड के सामान्य राजपूत परिवार में हुआ। इनके पिता का नाम आनंद सिंह बिष्ट और माता का नाम सावित्री देवी है। योगी ने 1989 में ऋषिकेश के भरत मंदिर इंटर कॉलेज से 12वीं पास की और 1992 में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित में बीएससी की पढ़ाई पूरी की। छात्र जीवन में ही वो राममंदिर आंदोलन से जुड़ गए थे। 90 के दशक में राममंदिर आंदोलन के दौरान ही योगी आदित्यनाथ की मुलाकात गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक कार्यक्रम हुई। इसके कुछ दिनों बाद योगी अपने माता.पिता को बिना बताए गोरखपुर जा पहुंचे और जहां संन्यास धारण करने का निश्चय लेते हुए गुरु दीक्षा ले ली। महंत अवैद्यनाथ भी उत्तराखंड के रहने वाले थे। जिन्होंने अजय सिंह बिष्ट को योगी आदित्यनाथ बनाने का काम किया।
गोरखनाथ मंदिर के महंत की गद्दी का उत्तराधिकारी बनाने के चार साल बाद ही महंत अवैद्यनाथ ने योगी आदित्यनाथ को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी भी बना दिया। गोरखपुर से महंत अवैद्यनाथ चार बार सांसद रहेए उसी सीट से योगी 1998 में 26 वर्ष की उम्र में लोकसभा पहुंचे और फिर लगातार 2017 तक पांच बार सांसद रहे। योगी आदित्यनाथ ने अपनी निजी सेना हिंदू युवा वाहिनी का निर्माण किया जो गौ-सेवा करने व हिंदू विरोधी गतिविधियों से निपटने के लिए बनाई गई। हम एक तेज-तर्रार राजनीतिज्ञ के रूप में अपनी छवि योगी आदित्यनाथ ने बना ली थी। योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी खासियतों में एक है कि वह जनता से सीधा संवाद करने में विश्वास रखते हैं। 2017 में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला तो सीएम के लिए कई चेहरे दावेदार थे लेकिन बाजी योगी के हाथ लगी। बतौर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुशासन, कुशल नेतृत्व का उत्तम उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने यह साबित कर दिखाया है कि सकारात्मक सोच और सतत प्रयास से किसी भी देश ,किसी भी प्रदेश और किसी भी समाज की तस्वीर बदली जा सकती है।

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