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बकरीद के लिये लॉकडाउन में ढील पर केरल सरकार को कड़ी फटकार, कहा- कांवर यात्रा आदेशों से सबक लो

New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केरल सरकार को टीपीआर वाले क्षेत्रों में भी बकरीद त्योहार के लिये राज्य में कोविड -19 प्रतिबंधों में ढील देने के लिये आड़े हाथों लिया। न्यायमूर्ति आर.एफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि किसी भी प्रकार के दबाव समूह, धार्मिक या अन्यथा किसी भी तरह का दबाव जीवन के अधिकार में हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को कांवड़ यात्रा मामले में दिये गये उसके आदेशों का पालन करने का निर्देश दिया। इससे पहले न्यायमूर्ति नरीमन ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक प्रतीकात्मक भौतिक कांवर यात्रा की अनुमति देने पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया था जो कांवर यात्रा की अनुमति देने के यूपी के फैसले पर द इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लेने के बाद तीसरी कोविड -19 लहर की आशंका में दिया गया था।

 

केरल में ईद-उल-अजहा के लिए रविवार से तीन दिनों के लिये लॉकडाउन में ढील को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की गई थी। सोमवार को राज्य सरकार ने अदालत में अपनी प्रतिक्रिया दाखिल करते हुये कहा कि कोविड -19 से निपटने के लिये लगाये गये प्रतिबंधों ने व्यापारियों को निराश कर दिया था खासकर उन व्यापारियों को जिन्होंने बकरीद के लिये माल का स्टॉक किया था। कारोबारी बकरीद पर बिक्री बढ़ने की उम्मीद कर रहे थे। सरकार ने यह फैसला लिया ताकि कारोबारियों के दुख को कुछ हद तक कम किया जा सके।
वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने बदले में तर्क दिया कि भारत में वर्तमान में 30,000 मामले आ रहे हैं, जिसमें से केवल केरल में 15,000 के आसपास आ रहे हैं। पीठ ने इस फैसले को “खतरनाक” करार दिया कि सभी दुकानों, यहां तक ​​​​कि गैर-जरूरी को भी श्रेणी डी में खोलने की अनुमति दी गई, जो संक्रमण की एक गंभीर श्रेणी को संदर्भित करता है। न्यायमूर्ति नरीमन ने कहा कि राज्य सरकार ने आंख मूंदकर कहा है कि दुकानें खोलने से कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन होगा।
राज्य सरकार ने लॉकडाउन में ढील देते हुये लोगों को आगाह किया था कि “जहाँ तक संभव हो” कम से कम एक खुराक के साथ टीकाकरण करने वाले ही दुकानों पर जायें। हालांकि, पीठ ने कहा कि “जहाँ तक संभव हो” और व्यापारियों के आश्वासन का उपयोग नाकाफी है। पीठ ने निष्कर्ष निकाला- हम केरल राज्य को भारत के संविधान के अनुच्छेद 144 के साथ पढ़े गए अनुच्छेद 21 पर ध्यान देने और कांवर यात्रा मामले में दिए गए हमारे आदेशों का पालन करने का निर्देश देते हैं।”

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