पुस्तक का विमोचन करने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा को पुस्तक सौंपते आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत। Image Source : tweeted by @himantabiswa

पाकिस्तान बनाने के लिये 1930 से योजनाबद्ध आबादी बढ़ाई गई, सीएए से मुसलमानों को कोई नुकसान नहीं

New Delhi : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने अपने दो दिवसीय असम दौरे के दौरान एक पुस्तक विमोचन समारोह में बुधवार को कहा कि भारत को दुनिया से धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद, लोकतंत्र सीखने की जरूरत नहीं है क्योंकि ये हमारी परंपराओं का हिस्सा हैं और हमारे खून में हैं। भागवत ने असम में एनआरसी-सीएए बहस पर एक किताब का विमोचन किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी मौजूद थे। सीएए और एनआरसी के मुद्दों पर बोलते हुये आरएसएस प्रमुख ने कहा- सीएए और एनआरसी भारत के किसी भी नागरिक के खिलाफ नहीं बने हैं। सीएए के कारण भारतीय मुसलमानों को कोई नुकसान नहीं होगा। विभाजन के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया था कि हम हमारे देश के अल्पसंख्यकों का ख्याल रखेंगे। हम आज तक उसका पालन कर रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान ने नहीं किया।

 

भागवत ने कार्यक्रम में कहा- राजनीतिक स्थिति को देखते हुये और सिर्फ राजनीतिक लाभ के नजरिये से ही सीएए और एनआरसी को मुद‍्दों में तब्दील कर दिया जाता है। कुछ लोग इसको सांप्रदायिक आधार पर देखने लगते हैं। इस तरह की बातचीत राजनीतिक लाभ के लिये होती है। उन पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। उनको इग्नोर करें। लेकिन हमें सावधान रहना होगा क्योंकि नागरिक राजनीति को बारीकी से देखते हैं। उन्होंने विभाजन और पाकिस्तान का जिक्र करते हुये कहा- 1930 से योजनाबद्ध तरीके से मुस्लिमों की आबादी बढ़ाने के प्रयास हुये। ऐसा विचार था कि जनसंख्या बढ़ाकर वर्चस्व स्थापित करेंगे और फिर इस देश को पाकिस्तान बनायेंगे। ये ​विचार पंजाब, सिंध, असम और बंगाल के बारे में था। सोच के स्तर में यह सच हुआ। बंटवारा हुआ और पाकिस्तान बना, लेकिन जैसा पूरा चाहिये था, वैसा नहीं हुआ।
आरएसएस के एक प्रवक्ता ने कहा कि भागवत ने असम के विभिन्न हिस्सों और अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और त्रिपुरा जैसे अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के संगठन के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की। प्रवक्ता ने कहा कि संगठन से संबंधित मामलों और महामारी के दौरान लोगों और समाज के कल्याण के उपायों पर चर्चा की गई। भागवत का आज कुछ राजनीतिक नेताओं से भी मिलने का कार्यक्रम है, लेकिन उनके नामों का खुलासा नहीं किया गया। राज्य में लगातार दूसरी बार भाजपा की सत्ता में वापसी के बाद आरएसएस प्रमुख का असम का यह पहला दौरा है। प्रवक्ता ने बताया कि मोहन भागवत 22 जुलाई को चेन्नई के लिये रवाना होंगे।

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