प्रतीकात्मक तस्वीर। Image Source : Agencies

मुग़ालता : कल तक जहां गुलदस्ता लिये लोगों की कतारें थीं वहां सन्नाटा, भीड़ नये ठिकाने पर

New Delhi : कई दिनों तक चली अटकलों के बाद आखिरकार बुधवार शाम को कैबिनेट में फेरबदल हो ही गया। अटकलों पर विराम लग गया। नये चेहरों को शामिल किया गया। कुछ अनुभवी लोगों से इस्तीफा ले लिया गया। जो होना था, हो गया। पर उसके बाद का जो नजारा है, वो देखने लायक है। कल तक जिन घरों के सामने मेला लगा रहता था उस घरों पर आज कोई फटकने भी नहीं गया। देर शाम से ही अभी-अभी पूर्व हुये मंत्रियों के घर वीरान पड़े हैं। लेकिन नये मंत्रियों के यहां गाड़ियों की लंबी कतारें शाम से ही लगनी शुरू हो गईं। बुधवार की रात से ही नये मंत्रियों के घरों के बाहर शुभचिंतकों की भीड़ हाथ में गुलदस्ते लिये, अपनी उपस्थिति दर्ज करने की प्रतीक्षा में। …और उन लोगों के घर के बाहर जिन्होंने अचानक खुद को कैबिनेट से बाहर पाया… एक सन्नाटा।

बुधवार की शाम की बात अगर करें तो कानून और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री के पद से इस्तीफा देने वाले रविशंकर प्रसाद के बंगले मदर टेरेसा क्रिसेंट के 21-मदर टेरेसा क्रिसेंट में शाम लगभग 7.30 बजे, अंदर पांच वाहन खड़े थे, लेकिन कोई समर्थक नहीं, बाहर सड़क पर कोई कार नहीं थी। प्रसाद एक बहुत ही सार्वजनिक प्रोफ़ाइल वाले मंत्री रहे। सार्वजनिक रूप से ट्विटर से भिड़नेवाले और अक्सर सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस का चेहरा। लेकिन बुधवार और गुरुवार को उनसे मिलनेवालों का कोई निशान नहीं था। वहीं दो किलोमीटर दूर, नारायण राणे के घर 28-अकबर रोड पर, कर्मचारी व्यस्त हैं। उनके शपथ लेने के बाद से ही किसी को सांस लेने की भी फुर्सत नहीं। ऐसा लग रहा है मानो दिल्ली में रहनेवाले सारे मराठी उमड़ पड़े हैं। पार्टी के नेता भी आ रहे हैं और परिचित भी। लोग लंबी कतारों में इंतजार कर रहे हैं।
वैसे हेडलाइन में तो पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्धन ही हैं। 8-तीस जनवरी मार्ग स्थित उनके बंगले के बाहर उजाड़ है। एक दो पत्रकार ही यदाकदा मंडरा रहे हैं। कोई कतार नहीं। कोई फूल नहीं, गुलदस्ता नहीं। किसी भी मंत्री ने इस सन्नाटे को चीरने का प्रयास नहीं किया। अलबत्ता कैबिनेट से हटाये गये बाबुल सुप्रियो ने जरूर अपनी चुप्पी तोड़ी। पहले एक फेसबुक पोस्ट में सुप्रियो ने लिखा कि उन्हें इस्तीफा देने के लिये कहा गया था, फिर इसे बदलकर उन्होंने “इस्तीफा दे दिया” कर दिया।

https://twitter.com/ABPNews/status/1413138427587928080?s=20
सुप्रियो ने पोस्ट किया- हां, जब धुआं होता है तो कहीं आग जरूर होती है। मीडिया में मेरे दोस्तों के फोन कॉल लेने में सक्षम नहीं हूं। मैं इसे खुद ही बता देता हूं। हां, मैंने मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया है। मैं माननीय प्रधान मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मुझे अपने मंत्रिपरिषद के सदस्य के रूप में देश की सेवा करने का सौभाग्य दिया … मेरे उन सहयोगियों को मेरी शुभकामनाएं।
6-कुशक रोड पर प्रकाश जावड़ेकर के घरों के बाहर और 27-सफदरजंग रोड पर रमेश पोखरियाल निशंक के घरों के बाहर भी हालात अलग नहीं है। सब सूना, सिर्फ सन्नाटा।

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