अंग्रेजी नहीं आती थी कॉलेज में साथी उड़ाते थे मजाक, UPSC क्लियर कर अब बन गए IPS ऑफिसर

New Delhi: अंग्रेजी आज एक भाषा ही नहीं एक क्लास बन चुकी है। 12वीं तक हिंदी मीडियम पढ़े लिखे छात्र जब अचानक कॉलेज में कदम रखते हैं तो उनका सामना विभिन्न माध्यम और विषयों से पढ़कर आए विद्यार्थियों से होता है। कॉलेज में अंग्रेजी को पढ़ाई लिखाई और स्टडी मटीरियल के लिए कॉमन लैंग्वेज के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में जब हिंदी पट्टी के छात्र कॉलेज जाते हैं तो उन्हें इससे जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लेकिन जो छात्र इसे एक समस्या न मानकर स्किल के तौर पर देखते हैं वो आसानी से आगे बढ़ जाते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है आईपीएस ऑफिसर निकेतन बंसीलाल कदम की जो कभी अंग्रेजी को अपने लाइफ की सबसे बड़ी बाधा के तौर पर देखते थे। उन्होंने न केवल इससे पार पाया बल्कि यूपीएससी परीक्षा भी अंग्रेजी में दी और 2018 में वो सफल हुए। निकेतन ने एक इंटरव्यू में बताया कि किस तरह इस परीक्षा को पास किया जाए।

निकेतन नासिक, महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। वो जहां रहते हैं वो ज्यादा विकसित क्षेत्र नहीं है एक छोटा सा गांव सा ही है। उनकी स्कूल तक की पढ़ाई उनके गांव के ही सरकारी हिंदी मीडियम स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने कंप्यूटर टैक्नोलॉजी में डिप्लोमा किया। इसके बाद उन्होंने कंप्यूटर साइंस से ही इंजीनीयरिंग की। यहां से उनका प्लेसमेंट एक आईटी कंपनी में हुआ जहां उन्होंने दो साल नौकरी की। नौकरी अच्छी खासी थी ठीक-ठाक पैकेज था इसके बावजूद भी उन्होंने नौकरी छो़ड़ने का फेसला किया। वो बताते हैं कि नौकरी करते हुए उन्हें लगा कि वो सारी जिंदगी यही सब करते हुए नहीं गुजार सकते तो उन्होंने यूपीएससी की तैयारी करने का मन बनायाा। उनका बचपन गरीबी में ही बीता वो बताते हैं कि उनके पास पहनने को केवल दो जोड़ी ही कपड़े हुआ करते थे जिन्हें पहनकर वो कॉलेज जाते थे।

दो साल नौकरी करने के बाद उनके पास अच्छी सेविंग्स हो गईं थी। जिसके बाद वो यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली आ गए। पहले साल उन्हें परीक्षा को समझने में लग गया। क्योंकि वो इंजीनीयरिंग के बैग्राउंड से थे जो जनरल स्टडीज में उन्हें थोड़ी समस्याएं हुईं। पहले दो प्रयास में उनका सेलेक्शन नहीं हुआ। इन दोनों ही प्रयासों में उन्होंने प्री बेहद अच्छे अंकों से पास किया। उनके प्री में इतने अच्छे अंक थे कि परीक्षा पास करने वाले कैंडीडेट के भी उनके जैसे अंक प्रीा में नहीं थे। यहां उन्होंने ये सीखा कि थोड़ी सी चूक इस परीक्षा में काफी भारी साबित होती है। इसलिए उन्होंने बारीकी से पढ़ाई करने के लिए एकदम जीरो से पढ़नाा शूरू किया। वो बाकी एसपीरेंट्स को सलाह भी देेते हैं कि परीक्षा की तैयारी करने से पहले ये बेहतर है कि आप शुरू से तैयाारी करें ये भूल जाएं कि आपको कुछ भी आता है। जो अभी तक पता है या जो कुछ सीखा उसे भुलाकर शुरू से पढ़िए लेकिन अब इसे तरीके से पढ़िए।

उन्हें सफलता तीसरी बार में मिली। दो प्रयास वो दे चुके थे तीसरे प्रयास में उन्होंने यही टेक्नीक अपनाई रीडिंग और राईटिंग या फिर टेस्ट सीरीज सभी का अभ्यास उन्होंने एकदम शुरू से किया। वो सभी आसपिरेंट्स को सलाह देते हैं कि वो प्री और मेन्स की तैयारी साथ करें और दोनों को अलग न मानें। दूसरी बात कि खूब रिवीजन करें। उन्होंने खुद एक किताब को आठ बार तक पढ़ा था और तीसरी बात की टेस्ट सीरीज दें पर ज्यादा फोकस पिछले साल के क्वैश्चंस पर करें।

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