UPSC में लगातार तीन बार रहे असफल, हर बार इंटरव्यू में हुए रिजेक्ट, नहीं मानी हार ऐसे पाई सफलता

New Delhi: यूपीएससी परीक्षा में अभ्यार्थी इंटरव्यू तक बड़ी मेहनत से पहुंच पाते हैं, इतनी तैयारी के बाद भी जब कोई इंटरव्यू में रिजेक्ट हो जाए या मेंस लिखे और पास न हो तो बड़ा दुख होता है। कुछ ऐसी ही कहानी है 2018 के बैच के आईएस ऑफिसर गोपाल कृष्ण की। गोपाल का आईएएस ऑफिसर बनने का सफर उतार चढ़ावों से भरा रहा। पहले प्रयास में प्री निकालने वाले गोपाल कभी मैन्स तो कभी इंटरव्यू में अटक जाते थे। आखिरकार अपने चौथे प्रयास में उन्होंने 265वीं रैंक के साथ सफलता हासिल की। गोपाल ने अपने कई इंटरव्यू में कई गलतियों को उजागर किया जो उन्होंने तैयारी के दौरान की थी। आइए जानते हैं उनकी स्ट्रैटजी और उनकी आईएएस जर्नी के बारे में।

गोपाल बंगाल के रहने वाले हैं। उन्होंने मेडिकल की पढाई की है। पढाई पूरी करने के बाद उन्होंने मेडिकल ऑफिसर के रूप में दो साल काम किया लेकिन कुछ कारणों से वो डॉक्टर नहीं बन पाए तो उन्होंने सिविल सेवा का रास्ता चुना। साइंस बैगराउंड होने के कारण उन्होंने प्री पहले साल ही निकाल दिया लेकिन इसके बाद वो कभी मैन्स में अटकते तो कभी इंटरव्यू में। दूसरे प्रयास में उनका प्री, मेन्स, इंटरव्यू सब क्लियर हुआ लेकिन फाइनल लिस्ट में नाम नहीं आया। तीसरी बार में यानी साल 2016 में उन्होंने परीक्षा तो पास की लेकिन रैंक अच्छा न होने के कारण उन्हें उन्हें इंडियन ऑडिट और एकाउंट्स सर्विसेस सेवा एलॉट हुई। तीन साल लगातार एक परीक्षा में असफल होने के बाद और जीवन के लंबे संघर्ष के बाद उन्हें पहली सरकारी नौकरी मिली। गोपाल ने नौकीर जॉइन की लेकिन प्रयास अभी भी जारी रखे।

उन्होंने नौकरी करते हुए ही तैयारी जारी रखी और अगले साल ही यानी 2017 में फिर से परीक्षा दी इस बार उन्होंने ये परीक्षा 265वीं रैंक के साथ पास की और उन्हें आईएएस पोस्ट अलोट हो गई। इस प्रकार गोपाल को चार साल के संघर्ष के बाद मंजिल मिली। तैयारी के दौरान अपनी सबसे बड़ी गलती वो अपने गलत टाइम मैनेजमेंट और सिलेबस की रिक्वायरमेंट्स को न समझ पाने को मानते हैं। अपनी इस कमी को उन्होंने अपने आगे के प्रयासों में सुधारा। यही सलाह वो अभ्यार्थियों को देते हैं जो इस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। वो कहते हैं शॉट टर्म से लेकर मीडियम और लांग टर्म गोल बनाएं और उन्हें पूरा करे।. एक डायरी में लिखते चलें कि आपको कब क्या करना है वरना अंत में देर हो जाती है। वे कहते हैं कि समय सभी के पास उतना ही होता है पर सफल वही होता है जो समय को बांट लेता है और टारगेट पूरा करता चलता है।

उनका मानना है कि अभ्यार्थी चाहें वर्किंग हो या फिर केवल स्टूडेंट सभी को स्मार्ट स्टडी को फॉलो करना चाहिए। किसी भी सब्जेक्ट को विशेषज्ञता हासिल करने के लिए नहीं पढ़ना चाहिए। जितना सिलेबस में पूछ रहा है कट टू कट उतना ही पढ़िए। इससे टाइम की काफी बचत होती है। इसके अलावा वो कहते हैं कि हमेशा नोट्स बनाने में ही न लगे रहें रीडिंग और राइटिंग में अपना टाइम दें। नोट्स के लिए किसी इंस्टीट्यूट या कोचिंग का सहारा लें उनकी गुणवत्ता को परखें और उन्हीं को पढ़ कर तैयारी करें। मैन्स निकालने के लिए आपकी जानकारी और लिखने की कला को सबसे ज्यादा परखा जाता है तो इस पर खास ध्यान दें।

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