22 की उम्र और पहले ही प्रयास में बन गए IAS, हिंदी मीडियम से हुई पढ़ाई, पिता को माना अपना गुरू

New Delhi: सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने और फिर उसे पास करने में छात्र आमतौर पर कई साल लगा देते हैं। परीक्षा का स्तर इतना कठिन माना जाता है कि एक धारणा बन गई है कि बिना कोचिंग इस परीक्षा को पास करना असंभव कार्य जैसा होता है। लेकिन आज हम आपको जिस आईएएस अधिकारी के बारे में बताने जा रहे हैं उन्होंने न सिर्फ पहले प्रयास में बिना कोचिंग सबसे कठिन समझी जाने वाली इस परीक्षा को पास किया बल्कि टॉपर्स की लिस्ट में अपनी जगह भी बनाई। और ध्यान रहे उन्होेंने ये सफलता महज 22 साल की उम्र में हासिल की है। इस आईएएस अधिकारी का नाम है हिमांशु नागपाल जिन्होंने साल 2018 की यूपीएससी परीक्षा में ऑलओवर 26वीं रैंक के टॉप स्थान प्राप्त किया। जब वो पढ़ाई कर रहे थे तभी उनके पिता की डेथ हो गई यही नहीं इस दौरान उनके भाई की भी डेथ हो गई। इतने त्रासदी भरे विद्यार्थी जीवन में हिमांशु ने धैर्य नहीं खोया और अपने पिता का सपना पूरा किया।

हिमांशु मूल रूप से हरियाणा के हिसार के रहने वाले हैं। वो शुरू से ही एक ब्राईट स्टूडेंट रहे हैं। उनकी पढ़ाई हिंदी मीडियम स्कूल से सीबीएसई बोर्ड से हुई है और उन्होंने दसवीं और बारहवीं की परीक्षा अच्छी पर्सेंटेज के साथ पास की। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वो पढ़ाई में कितने होशियार रहे होंगे। 12वीं में अच्छे अंक आने की वजय से उनका दाखिला दिल्ली के हंसराज कॉलेज में हो गया। यहां उन्होंने ग्रेजुएशन के लिए बीकॉम में एडमिशन लिया। उन्हें कॉलेज में दाखिला दिलाने उनके पिता साथ आए थे। हिमांशु दाखिले के पहले दिन जब अपने पिता के साथ कॉलेज के प्रांगण में बैठे थे तो पिता ने अचीवमेंट बोर्ड पर कई नाम देखे तो हिमांशु से कहा कि मुझे तेरा नाम इस बोर्ड पर चाहिए। इसके कुछ ही दिनों बाद उनके पिता की डेथ हो गई।

हिमांशु के दिमाग में अपने पिता द्वारा कहे गए वो आखिरी शब्द कई सालों तक गूंजते रहे। हिमांशु बताते हैं कि मेरे जीवन का कोई लक्ष्य नहीं था लेकिन उन शब्दों ने मेरी जिंदगी बदल दी। हिमांशु अभी अपने पिता के सदमें से बाहर भी नहीं आए थे कि उनके भाई की डेथ की खबर उन्हें मिली। अब उन्होंने फैसला कर लिया कि पढ़ाई लिखाई छोड़ कर घर जाकर केवल मां का ही ध्यान रखना है। ऐसे में उनके चाचा ने उन्हें समझाया और उनका साथ देते हुए उनकी पढ़ाई का सारा खर्च उठाया। हिमांशु को जल्द ही कोई नौकरी चाहिए थी। इसलिए उन्होंने कॉलेज में ही यूपीएससी देने का मन बना लिया था। उन्होंने तय किया था कि एक दो बार में नहीं निकला तो कोई दूसरी नौकरी की जाएगी। लेकिन जैसे उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई पूरी की यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी और पहले ही प्रयास में सबसे कठिन समझी जाने वाली इस परीक्षा को न केवल पास किया बल्कि टॉप रैंक भी हासिल की।

ज्यादातर छात्रों की तरह हिमांशु भी अंग्रेजी के कम ज्ञान होने के कारण खुद को पिछड़ा हुआ महसूस करते थे। उन्होंने 12वीं तक हिंदी में ही पढ़ाई की थी और कॉलेज में आते ही उनका सामना कठिन अंग्रेजी से हुआ लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी अपनी अंग्रेजी को इतना मजबूत किया कि उन्होंने परीक्षा का माध्यम भी अंग्रेजी चुना। यूपीएससी कैंडिडेट्स को हिमांशु यही सलाह देते हैं कि अपने बैकग्राउंड को लेकर कभी खुद को कमतर न समझें। हिंदी, इंग्लिश से कोई फर्क नहीं पड़ता, फर्क इससे पड़ता है कि आप कैसे अपनी बात बेहतर ढंग से कह पाते हैं। हार्डवर्क, सही डायरेक्शन और सही मोटिवेशन आपको इस परीक्षा में सफल बनाते हैं लेकिन प्रयास भले धीमा हो पर रोज होना चाहिए।

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