5वीं तक पढ़े थे महाशय गुलाटी, अपने दम पर खड़ा किया MDH ब्रांड, आज 1500 करोड़ का कारोबार

New Delhi: आज MDH यानी महाशियां दी हट्टी मसाला कंपनी भारत की ही नहीं दुनिया की सबसे बड़ी मसाला कंपनियों में गिनी जाती है। भारत में तो इस कंपनी ने इतनी कामयाबी पाई कि MDH ब्रांड स्वाद का पर्याय ही बन गया। भारत के कोने कोने तक खाने में जायका घोलने वाली ये कंपनी आज सालाना 1500 करोड़ का कारोबार करती है। अचंभे की बात ये है कि इतनी बड़ी मसाला कंपनी को खड़ा करने वाले और MDH को MDH बनाने वाले महाशय धर्मपाल गुलाटी मात्र कक्षा 5 तक पढ़े थे। उन्होंने कभी भी किसी काम को छोटा नहीं समझा जो काम मिला पूरी ईमानदारी से किया। उनकी इसी सोच ने उन्हें इतनी बड़ी मसाला कंपनी का मालिक बना दिया। 5वीं तक पढ़े गुलाटी ने जल्द ही मसाला कंपनी खड़ी कर दी जिस में अच्छे खासे पढ़े लिखे कर्मचारियों का स्टाफ वहां नौकरी पाता था।

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आज ये मसाला किंग दुनियां को मसाले का सही स्वाद सौंपकर चला गया। उनका आज हर्ट अटैक से निधन हो गया। वो 98 साल के थे। महाशय गुलाटी का जन्म 27 मार्च, 1923 को सियालकोट (पाकिस्तान) में हुआ था। 1947 में देश विभाजन के बाद वह परिवार के साथ भारत आ गए थे। तब उनके पास महज 1,500 रुपये थे। उनका जीवन काफी संघर्ष भरा रहा। जब वो भारत आए तो उनके पास न तो यहां संपत्ति थी न ही किसी से जान-पहचान थी। यहां आने के बाद उन्हें जो करना था अपने दम पर ही करना था। उन्होंने परिवार के भरण-पोषण के लिए तांगा चलाना शुरू किया। धीरे-धीरे पैसा कमाकर उन्होंने दिल्ली के करोल बाग स्थित अजमल खां रोड पर छोटी सी मसाले की एक दुकान खोली जो कि खूब चली। इसी दुकान ने उन्हें मसाले का सरताज बनने का सपना दिखाया था।

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धर्मपाल गुलाटी की दिल्ली कर्म भूमि रही। यहीं उन्होंने तांगा चलाया, साबुन का छोटा सा कारोबार किया लेकिन मन नहीं लगा। बाद में उन्होंने दिल्ली के करोलबाग में मसाले की छोटी सी दुकान खोली। उन्हें मसाले की जबरदस्त पहचान थी। अच्छा मसाला कहां मिलेगा उन्होंने कुछ महीनों में ही सब जान लिया था। किस मसाले को कैसे और कितनी मात्रा में इस्तेमाल कर नया मसाला तैयार करना है ये सभी गुण वो जल्दी ही सीख गए। उनके इसी हुनर ने कंपनी को मसाले की दुनिया में सबसे प्रशिद्ध ब्रांड के रूप में खड़ा कर दिया। 5वीं पास धर्मपाल गुलाटी उम्र के हिसाब से भारत के सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले सीईओ थे। यूरोमॉनिटर के मुताबिक, धरमपाल गुलाटी को 2018 में 25 करोड़ रुपये इन-हैंड सैलरी मिलती थी।

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धरमपाल गुलाटी जिंदादिल इंसान थे। इतना बड़ा जीवन उन्होंने निरोग और हंसते-हंसते जिया। अपनी कंपनी का एड भी वो खुद ही करते थे। इसी एड से वो दुनिया भर में मशहूर हो गए। वो दुनिया भर में इतनी उम्र होने के बाद इकलौते ऐसे व्यक्ति थे जो लगातार एड करता हो। गुलाटी सामाजिक काम और दान धर्म में भी काफी आगे रहते थे। व्यापार के साथ ही उन्होंने कई ऐसे काम भी किए हैं, जो समाज के लिए काफी मददगार साबित हुए। इसमें अस्पताल, स्कूल बनवाना आदि शामिल है। वह 20 स्कूल और 1 हॉस्पिटल भी चला रहे थे. इसके अलावा वह समय-समय पर जरूरतमंद लोगों की भी मदद करते रहते थे।

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