यूट‍्यूबर गौरव वासन बाबा के ढाबा के कांता प्रसाद व उनकी पत्नी के साथ। Image Source- Photo is tweeted by Gaurav Wasan

बाबा का ढाबा विवाद का अंत : यूट‍्यूबर ने कहा- मैंने माफी स्वीकार की, अंत भला तो सब भला

New Delhi : YouTuber गौरव वासन की पहल के बाद “बाबा का ढाबा” विवाद समाप्त हो गया है। गौरव ने कहा- मदद के उद‍्देश्य से दान प्राप्त धन को ठगने के आरोप में अस्सी साल के बाबा की माफी स्वीकार कर ली है। गौरव वासन ने हैशटैग #BABAKADHABA के साथ ट्वीट किया- सब अच्छा है। अंत भला हो सब भला। क्षमा करने वाला व्यक्ति गलती करने वाले से बड़ा होता है – यही मेरे माता-पिता ने मुझे सिखाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गौरव वासन की पोस्ट बाबा का ढाबा के मालिक कांता प्रसाद द्वारा स्पष्टीकरण की पेशकश के बाद आई। प्रसाद ने वासन पर धोखाधड़ी का आरोप लगाने की बात की माफी मांगी। बाबा के ढाबा के कांता प्रसाद ने आरोप लगाया था कि YouTuber गौरव वासन ने उन्हें दान में प्राप्त सभी पैसे नहीं दिये। वासन ने आरोपों से इनकार किया और अपने दावों को साबित करने के लिए दस्तावेज पेश किये थे।

अब बाबा ने एक वीडियो में माफी की मुद्रा में हाथ जोड़कर रोते हुये कहा- वो लड़का कोई चोर नहीं था। न तो हमने कभी उसको चोर कहा।
पिछले साल गौरव वासन ने “बाबा का ढाबा” के मालिक को कोरोनोवायरस महामारी के बीच अपने व्यवसाय के नुकसान के बारे में इमोशनल बात करते हुये एक वीडियो शूट किया। यह वीडियो वायरल हो गया। जैसे ही वीडियो को व्यापक रूप से शेयर किया जाने लगा, सैकड़ों लोग दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में उनके भोजनालय के बाहर लाइन में लग गये। देश भर के लोगों ने भी कांता प्रसाद की आर्थिक मदद करना शुरू कर दिया, जिससे उन्हें एक रेस्तरां शुरू करने में मदद मिली। बाबा का ढाबा जोमैटो पर भी लिस्ट हुआ था।
लेकिन प्रसाद ने इस साल 15 फरवरी को अपना रेस्तरां बंद कर दिया क्योंकि वह इसे चला पाने में सक्षम नहीं हो पाये। पैसे खत्म हो गये। प्रसाद के हवाले से समाचार एजेंसी एएनआई ने पहले कहा था- इसे चलाने में लगभग ₹ 1 लाख का भारी खर्च शामिल था और हमें वहां काम करने वाले श्रमिकों को ₹ 36,000 प्रति माह का भुगतान करना पड़ता था और उस दुकान का किराया ₹ 35,000 प्रति माह था। अन्य खर्चों में बिजली बिल, पानी का बिल आदि शामिल थे। निवेश की तुलना में रिटर्न कम था इसलिये इसे बंद करना जरूरी था क्योंकि हम नुकसान उठा रहे थे।
80 वर्षीय कांता फिर से फुटपाथ पर “बाबा का ढाबा” चलाने लगे। लेकिन उन्होंने कहा कि जब तक वह जीवित रहेंगे तब तक इस भोजनालय को चलाना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा- हमने पिछले साल दान के रूप में प्राप्त धन से मेरे और मेरी पत्नी के लिये 20 लाख रुपये रखे हैं। भविष्य को सुरक्षित रखने के लिये।

 

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