निहारिका की यह तस्वीर सोशल मीडिया प्लैटफार्म पर वायरल हो रही है।

साहस : कोरोना होने पर 2 किमी तक ससुर को पीठ पर लेकर चली, लोग दे रहे शाबाशी, पर जरूरत पर मदद नहीं की

New Delhi : वो एकाएक ट‍्विटर पर वायरल हो गई। उसे सेलेब्रिटी वाली पब्लिसिटी मिलने लगी। आखिर हो भी क्यों न। वो अपने ससुर को अपनी पीठ पर उठाकर हॉस्पिटल तक ले गई, जब उसके ससुर को कोरोना हो गया। उसकी यह तस्वीर खींचकर किसी ने ट‍्विटर पर डाल दिया और देखते ही देखते तस्वीर वायरल हो गई। हालांकि गुवाहाटी नगांव के राहा की 24 वर्षीय निहारिका दास का कहना है कि मैं तो इश्वर से यही मनाउंगी कि जो मैंने सहा, जो बर्दाश्त किया उससे किसी और को, कभी न गुजरना पड़े। 2 जून को निहारिका के 75 वर्षीय ससुर थुलेश्वर दास, जो कि राहा के भाटीगांव में सुपारी विक्रेता हैं, में कोरोना के लक्षण दिखाने शुरू हो गये। इसके बाद निहारिका उन्हें घर के निकटतम 2 किमी दूर शहर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक ले जाने के लिये एक ऑटो-रिक्शा की व्यवस्था की। पर उसने जो सोचा वैसा हुआ नहीं।

निहारिका ने बताया- मेरे ससुर इतने कमजोर थे कि खड़े भी नहीं हो सकते थे। मेरे पति सिलीगुड़ी में काम पर गये थे, इसलिए मेरे पास उन्हें अपनी पीठ पर बिठाने और कुछ दूरी पर खड़ी गाड़ी में ले जाने के अलावा कोई चारा नहीं था। मेरे छह साल का बेटा है और कोई भी इस परिस्थति को महसूस कर सकता है। चूंकि मेरे घर तक आने-जाने वाली सड़क चलने योग्य नहीं थी, इसलिए ऑटो मेरे घर के दरवाजे तक नहीं पहुंच सका। तो पीठ पर ससुर को लादने और गाड़ी तक ले जाने के सिवा और कोई चारा भी नहीं था।
लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में थुलेश्वर के कोरोना पॉजेटिव रिपोर्ट के बाद अधिकारियों ने सलाह दी कि कि उनके ससुर की हालत गंभीर है और वे उन्हें 21 किमी दूर नागांव में एक कोविड अस्पताल ले जायें। उन्होंने कहा- अब हमें इस दूरी के लिये एक और निजी वाहन के लिये फोन करना पड़ा। कोई एम्बुलेंस या स्ट्रेचर नहीं था, इसलिए मुझे उसे फिर से कार में ले जाना पड़ा। लोग घूरते रहे, हमसे दूर-दूर तक दूरी बनाये रखते थे, लेकिन किसी ने मदद की पेशकश नहीं की। मेरे ससुर लगभग बेहोश हो गये थे और मुझे उन्हें ले जाने के लिये शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत ताकत लगानी पड़ी।
इसी दरम्यान किसी व्यक्ति ने उनकी तस्वीर ले ली। इस तस्वीर में निहारिका एक गुलाबी मेखला सैडोर में हैं और उसके ससुर उसकी पीठ पर सवार हैं। यह तस्वीर पिछले हफ्ते से सोशल मीडिया पर छाई हुई है। निहारिका ने बताया- आखिरकार, हमें नगांव सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया। मुझे अपने ससुर को अपनी पीठ पर तीन स्टेयर केस की सीढ़ियों तक ले जाना पड़ा। मैंने मदद मांगी लेकिन कोई उपलब्ध नहीं था। मुझे लगता है कि मैंने उस दिन अपने ससुर को अपने कंधे पर उठाकर करीब 2 किलोमीटर का फासला तय किया।
देखते ही देखते सोशल मीडिया पर एक मॉडल बहू के रूप में रोल मॉडल की तरह प्रचारित हो गईं। इस दौरान उनको अपने सेलेब्रिटी स्टेटस की तब तक कोई खबर ही नहीं हुई जब तक कि एक लोकल न्यूज चैनल ने उन्हें इंटरव्यू के लिये संपर्क नहीं किया। वैसे सोशल मीडिया पर तक तक उनके तारीफों के हजारों पोस्ट तैर रहे थे। उन्होंने कहा- बेशक, मुझे खुशी है कि लोगों को तस्वीर देखकर अच्छा लगा। फोटो के माध्यम से, मैं केवल यही संदेश देना चाहती हूं कि लोग एक-दूसरे की मदद करें- चाहे वह आपके माता-पिता हों, ससुराल वाले हों या फिर अजनबी हों। अकेलापन और पूरी तरह टूटा हुआ महसूस करना।
उन्होंने कहा- जब मैं फंसी हुई थी, एक एम्बुलेंस बहुत मदद कर सकती थी। हम उसे किराये के लिये एक छोटी वैन में अस्पताल ले गये। सौभाग्य से, उसे रास्ते में ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं थी। अगर ऑक्सीजन की जरूरत होती तो मेरे ससुर बच नहीं पाते। थुलेश्वर की हालत बिगड़ने पर 5 जून को गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। सोमवार की रात उन्होंने वायरस के कारण दम तोड़ दिया।

 

निहारिका बोली- मैं उनके बहुत करीब थी और वह मुझे ‘ज़ोरू बुरी’ (छोटी बहू) कहते थे। जब वह होश में थे, तो मैंने उन्हें हमारी तस्वीरें भी दिखाईं जो वायरल हो गईं थीं। वह हैरान थे और चिंतित थे कि लोग क्या कहेंगे। मैंने उनसे कहा कि लोग असल में हमारी तारीफ कर रहे हैं। फिर उन्होंने मजाक किया और मुझसे पूछा कि मुझे उसे ले जाने की ताकत कहां से मिली?

फिलहाल तो अपने ससुर का के इस सवाल का जवाब निहारिका के पास भी नहीं है।

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