फिर फुटपाथ पर लौट आया ‘बाबा का ढाबा’- 5 लाख का रेस्तरां पर निवेश बेकार गया, बर्तन-कुर्सियां बेच पाये 36 हजार

New Delhi : आपके कर्म आपका पीछा नहीं छोड़ती। और अगर आप फुटपाथ पर रहने के योग्य हैं तो कोई चाहकर भी आपका भला नहीं कर सकता। आपकी सोच गिरी हो तो आप उठ नहीं सकते। इस तरह की तमाम कोट‍्स बाबा के ढाबा पर फिट बैठ रही हैं। क्यों? क्योंकि बाबा का ढाबा फिर से फुटपाथ पर आ गया है। पिछले एक साल में जब से उन्हें जनता के बेइंतहा हमदर्दी से ढेर सारा पैसा मिला तब से लेकर अभी तक उन्होंने सिर्फ बात का बतंगड़ किया, तमाशा किया, केस किया। और अंत में फिर से फुटपाथ पर आ गये। अब लोगों के मन में उनके प्रति ऐसी हमदर्दी होगी ये तो भविष्य ही बतायेगा लेकिन ढाबा के मालिक कांता प्रसाद को खुद यह एहसास हो गया है कि उन्होंने गलतियां की हैं। वे लगातार माफी मांग रहे हैं।

पिछले साल की रातोंरात सफलताओं में से एक बाबा का ढाबा थे। खैर छह महीने की प्रसिद्धि और गौरव के बाद बुजुर्ग दंपत्ति फुटपाथ पर वापस आ गये हैं क्योंकि वे दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में अपनी सड़क किनारे रेस्तरां को चला नहीं पाये। लॉकडाउन ने हालत और पस्त कर दी। पिछले साल एक YouTuber ने कांता प्रसाद और उनकी पत्नी बादामी देवी का एक वीडियो साझा किया था, जो अपने सड़क किनारे भोजनालय में गुजारा करने के लिये संघर्ष कर रहे थे। वीडियो वायरल हो गया और बाबा का ढाबा रातोंरात सफल हो गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने भोजनालय के बाहर अपना खाना खरीदने, सेल्फी क्लिक करने और पैसे दान करने के लिए बड़ी लाइनें लगाईं।
फूड डिलीवरी सर्विसेज और रेस्टोरेंट फाइंडर Zomato ने भी अपनी वेबसाइट पर इस रेस्टोरेंट को लिस्ट किया। जब लोगों की हमदर्दी से खूब पैसे इकट‍्ठे हुये तो कांता प्रसाद ने एक नया रेस्तरां खोला था। उसने अपने सारे कर्ज भी लौटा दिये और अपने लिये स्मार्टफोन भी खरीद लिया। हालांकि, रेस्तरां असफल रहा और फरवरी में बंद हो गया, जिससे वह और उसकी पत्नी एक बार फिर अपने सड़क किनारे स्टाल पर लौट आये हैं। लेकिन जगह-जगह तालाबंदी के कारण ग्राहकों के लाले पड़े हैं।
प्रसाद ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया- कोविड लॉकडाउन के कारण ग्राहक न के बराबर हैं। हमारी दैनिक बिक्री लॉकडाउन से पहले 3,500 रुपये से घटकर अब 1,000 रुपये हो गई है। हमारे आठ लोगों के परिवार के लिये आय पर्याप्त नहीं है। पिछले साल की सफलता के बाद, प्रसाद ने नया रेस्तरां खोलने के लिए 5 लाख रुपये का निवेश किया और तीन कर्मचारियों को काम पर रखा। सफलता की एक संक्षिप्त अवधि के बाद फुटफॉल काफी कम हो गया और प्रसाद को इसे बंद करना पड़ा। उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया- औसत मासिक बिक्री कभी भी 40,000 रुपये से अधिक नहीं हुई। सारा नुकसान मुझे उठाना पड़ा। अंत में, मुझे लगता है कि हमें एक नया रेस्तरां खोलने की गलत सलाह दी गई थी। रेस्तरां बंद होने के बाद 5 लाख रुपये के कुल निवेश में से, हम कुर्सियों, बर्तनों और खाना पकाने की मशीनों की बिक्री से केवल 36,000 रुपये की वसूली करने में कामयाब रहे।
Youtuber गौरव वासन वह व्यक्ति थे जिन्होंने एक Youtube वीडियो के माध्यम से कांता प्रसाद के भोजनालय की खराब स्थिति को उजागर किया था। हालांकि, प्रसाद ने बाद में वासन और उसके सहयोगियों के खिलाफ कथित रूप से दान में मिले पैसे के दुरुपयोग के लिए धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वासन ने जानबूझकर केवल अपने और अपने परिवार / दोस्तों के बैंक विवरण और मोबाइल नंबर दाताओं के साथ साझा किये और शिकायतकर्ता को कोई जानकारी प्रदान किये बिना भुगतान के विभिन्न तरीकों यानी बैंक खाते / वॉलेट के माध्यम से बड़ी मात्रा में दान एकत्र किया।

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