भारतीय प्रशासनिक सेवा के लोकेश कुमार जांगिड़। Image Source- Photo tweeted by lokesh jangid

एक बेमिसाल आईएएस अधिकारी : 54 महीने में 9 बार ट्रांसफर होने के बाद भी सिस्टम के खिलाफ खड़े हैं

New Delhi : यदि आप भारत में रहते हैं और अपने सिस्टम पर बेस्ड भारतीय फिल्में देखते हैं तो आप इस तथ्य से भलिभांति परिचित होंगे कि देश के भीतर प्रशासनिक व्यवस्था किताबों के अनुसार काम नहीं करती है। सीधे शब्दों में कहें तो, अच्छा करने या ईमानदार होने की कोशिश करने वाले अधिकारियों को अक्सर इधर-उधर धकेल दिया जाता है। एक स्थान से दूसरे स्थान पर तब तक ट्रांसफर किया जाता है जब तक वो सिस्टम में पूरी तरह से ढल नहीं जाये। खैर, कई ऐसे अफसर भी हमारे संविधान और किताबी सिद्धांत को परखने की कोशिश करते हैं। मध्य प्रदेश के एक आईएएस अधिकारी भी इसी सोच के हैं, जो 54 महीनों की अवधि में 9 बार ट्रांसफर झेलने के बाद इस “व्यवस्था” की आलोचना करने के लिये चर्चा में आ गये हैं। अब तो उन्हें गुमनाम कॉल्स से धमकी भी मिल रही है।

2014 बैच के आईएएस अधिकारी लोकेश कुमार जांगिड़ को एसडीएम शहडोल, उप सचिव शहरी विकास, सीईओ जिला पंचायत हरदा, अतिरिक्त कलेक्टर गुना, अतिरिक्त प्रबंध निदेशक राज्य शिक्षा केंद्र, अतिरिक्त कलेक्टर बड़वानी के पद पर पदस्थापित किया जा चुका है और हाल ही में राज्य शिक्षा केंद्र का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है। स्पष्ट रूप से निराश 35 वर्षीय आईएएस अधिकारी ने इस व्यवस्था के खिलाफ अपनी बेबसी जाहिर की जिसके लिये उन्हें सिग्नल ऐप पर मध्य प्रदेश आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन (एमपीआईएएसओए) के एक क्लोस्ड ग्रुप से हटा दिया गया।
अब जांगिड़ की ग्रुप में बातचीत की स्क्रीनशॉट ऑनलाइन लीक होने के बाद यह घटना सामने आ गई है। सोमवार (14 जून) को उन्होंने पोस्ट किया था- दिलचस्प बात यह है कि जो लोग हर तरह के माफिया से पैसा लेते हैं, उनका एक खेत से दूसरे खेत में तबादला हो जाता है। और त्रुटिहीन ईमानदारी प्रदर्शित करनेवाले लोगों का ट्रांसफर सचिवालय में कर दिया जाता है। जांगिड़ ने सिविल सेवा बोर्ड को मजाक बताते हुये कहा कि आचरण के नियमों के तहत उनके हाथ नहीं बंधे हैं तो वह और खुलासा करेंगे। उन्होंने लिखा- मध्य प्रदेश में कार्यकाल की स्थिरता और सिविल सेवा बोर्ड नामक संस्था का मजाक। मैं रिटायरमेंट के बाद एक किताब लेकर आऊंगा और उम्मीद है कि सभी के सामने तथ्य ला पाऊंगा। अभी मेरे हाथ खूनी आचरण के नियमों से बंधे हैं।
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि कैसे एक कलेक्टर को ‘कमजोर’ कहने पर उन्हें हटाया गया था। जांगिड़ ने लिखा- …बेशक, नौकरशाही में कौन हैं जो इन दिनों केवल नीरो के मेहमान हैं। ऐसा ही कुछ शहडोल में भी हुआ था जब मैं एसडीएम था। मैंने कलेक्टर से कहा कि वह कमजोर कलेक्टर है, जो खूनी था। और मुझे उस आधार पर हटा दिया गया।

लीक के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने जांगिड़ को “अनुशासनहीनता” पर नोटिस दिया है और इसके लिये एक सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है। साथ काम करने वाले अधिकांश नौकरशाह जांगिड़ की इमानदारी की कसमें खाते हैं और आश्चस्ति देते हैं कि वह राज्य के ईमानदार आईएएस अधिकारियों में से एक हैं। उन्हें उनकी ईमानदारी पर कोई संदेह नहीं है।

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