अमरावती MP नवनीत कौर राणा का जाति सर्टिफिकेट फर्जी, हाईकोर्ट ने जब्त किया, 2 लाख का जुर्माना, सांसदी जायेगी

New Delhi : बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को अमरावती की सांसद नवनीत कौर राणा द्वारा 2013 में जमा किये गये गलत जाति प्रमाण पत्र को रद्द करते हुये जब्त कर लिया है। अदालत ने नवनीत कौर राणा को छह सप्ताह के भीतर प्रमाण पत्र सौंपने के लिये कहा है। उन पर 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। दो सप्ताह के भीतर महाराष्ट्र कानूनी सेवा प्राधिकरण को 2 लाख रुपये भरने का निर्देश दिया है। अदालत ने जिला जाति जांच समिति, मुंबई की भी खिंचाई की, जिसने नवंबर 2017 में प्रमाण पत्र को मान्य किया था। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद नवनीत कौर राणा को अपनी संसदीय सदस्यता गंवानी पड़ सकती है। वे अमरावती से बतौर निर्दलीय जीतीं थीं और यह सीट अनुसूचित जाति के उम्मीदवार के लिये आरक्षित थी।

35 वर्षीय राणा ने 2019 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के समर्थन देने के फैसले के बाद जीता था। उन्होंने तत्कालीन शिवसेना सांसद आनंदराव अडसुल को हराया था। लेकिन 2019 के चुनावों के बाद से राणा भारतीय जनता पार्टी के करीब हो गईं। न्यायमूर्ति आरडी धानुका और न्यायमूर्ति वीजी बिष्ट की खंडपीठ ने मंगलवार को अमरावती के एक सामाजिक कार्यकर्ता राजू मानकर और नवनीत कौर राणा के एससी प्रमाण पत्र को मान्य करने वाली समिति द्वारा पारित आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुनाया।
शिवसेना के अडसुल ने 8 अगस्त, 2013 को नवनीत कौर राणा के पक्ष में डिप्टी कलेक्टर, मुंबई द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र को रद्द करने की मांग की। इस प्रमाण पत्र में राणा को “मोची” जाति से संबंधित बताया गया था। अडसुल का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता सीएम कोर्डे ने कहा कि नवनीत कौर राणा ने केवल 2014 में संसदीय चुनाव लड़ने के इरादे से अपने पिता को प्रमाण पत्र बनाने के लिये कहा था। हाईकोर्ट ने उल्लेख किया कि नवनीत कौर राणा द्वारा किया गया “मोची” जाति का दावा धोखाधड़ी का हिस्सा है। जांच समिति के समक्ष सांसद द्वारा प्रस्तुत “दस्तावेजों के दो सेट” “एक दूसरे के विरोधाभासी” थे। उच्च न्यायालय ने कहा कि ” गलत जाति प्रमाण पत्र” वास्तविक और योग्य व्यक्तियों को उनके उचित लाभों से वंचित कर सकता है।
कोर्ट ने कहा, “चूंकि प्रतिवादी ने जाति प्रमाण पत्र धोखाधड़ी से प्राप्त किया है और फर्जी दस्तावेजों के जरिये जाति प्रमाण पत्र बनवाया। ऐसे जाति प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया गया है और जब्त किया जाता है। कोर्ट ने कहा, “हमारा दृढ़ विचार है कि स्क्रूटनी कमेटी ने अपना काम बहुत सुस्ती से किया। ऐसे मामलों में सावधानी के साथ उच्च स्तर के समझदार दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। ”
पीठ ने याचिकाओं का निपटारा करते हुए समिति को यह भी याद दिलाया कि जाति प्रमाण पत्र को मान्य करने से पहले उसे अधिक “सतर्क” और “सावधान” होना चाहिए।

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